कलाकारों का सम्मान, रंगीन आतिशबाजी और चांदी के सिक्के के लकी ड्रॉ के साथ 16 दिवसीय रामलीला को दिया विराम


हनुमानगढ़। टाउन स्थित रामलीला रंगमंच पर श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित 16 दिवसीय रामलीला का बुधवार रात भगवान श्रीराम के राजतिलक प्रसंग के मंचन के साथ विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर पूरा रंगमंच श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। आमंत्रित अतिथि कन्हैया लाल लीला, मार्बल वाले ने सपरिवार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक किया। इसके बाद अयोध्या में रामराज्य की स्थापना की खुशी में रंगीन आतिशबाजी की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ इस पावन प्रसंग का आनंद लिया। समापन समारोह के दौरान रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समिति संरक्षक बालकृष्ण गोल्याण और अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाली शहर की विभिन्न संस्थाओं, प्रबुद्ध नागरिकों, आमजन, पुलिस प्रशासन, नगर परिषद प्रशासन, पत्रकारों और सनातन महावीर दल के स्वयंसेवकों का आभार जताया। उन्होंने स्टेज संचालनकर्ता प्रहलाद गुप्ता, स्टेज व्यवस्था प्रभारी सुंदर बंसल व हेमंत शर्मा, रामलीला निर्देशक प्रेम पारीक, उपनिर्देशक बहादुर सिंह व अशोक मिढ़ा, तिलक सुधाकर सहित सभी सहयोगियों के योगदान की सराहना की।

आधी रात को निकला चांदी के सिक्के का लकी ड्रॉ
समारोह के दौरान रात 12.15 बजे भगवान श्रीराम के हाथों 100 ग्राम चांदी के सिक्के का लकी ड्रॉ निकाला गया। कूपन संख्या 1183 के धारक पुरुषोत्तम मित्तल, मदन गोपाल सुभाष चंद, गुड़ मंडी, टाउन के नाम लकी ड्रॉ निकला। विजेता को भगवान श्रीराम के हाथों चांदी का सिक्का प्रदान किया गया। लकी ड्रॉ के निर्णायक मंडल में श्री अमरनाथ सेवा समिति के सचिव इंद्रजीत चराया, गौरव अरोड़ा और नगर परिषद की लेखा शाखा के भारत शर्मा शामिल रहे।
जनता के सहयोग से कायम है रामलीला की परंपरा
रामलीला समिति के निर्देशक प्रेम रतन पारीक ने सभी सहयोगियों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रामलीला के मंचन के दौरान मर्यादा और धार्मिक भावनाओं का पूरा ध्यान रखा गया। इसके बावजूद यदि किसी प्रकार की त्रुटि रह गई हो तो समिति उसके लिए क्षमाप्रार्थी है। उन्होंने कहा कि शहरवासियों का निरंतर सहयोग ही इस ऐतिहासिक रामलीला की सबसे बड़ी ताकत है। इसी सहयोग के बल पर पिछले 66 वर्षों से इस रंगमंच पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है। समिति सचिव दिनेश तलवाड़िया ने कहा कि 66 वर्ष पूर्व उनके पूर्वज स्वर्गीय लिच्छी राम तलवाड़िया ने रामलीला रूपी पौधा लगाया था, जो आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि इस रामलीला रंगमंच की शहर में विशेष मान्यता है। यहां दक्षिणमुखी बालाजी विराजमान हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर सवामणी अर्पित करते हैं। इस रंगमंच को मंदिर की तरह पूजा जाता है और शहरवासियों की इससे गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
अगले वर्ष फिर होगा रामलीला का मंचन
16 दिनों तक चले धार्मिक आयोजन के समापन के साथ ही इस वर्ष की रामलीला को विधिवत विश्राम दिया गया। धार्मिक प्रसंगों के सजीव मंचन, कलाकारों की प्रस्तुतियों और शहरवासियों के सहयोग से आयोजित इस रामलीला ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत किया। समिति ने सभी सहयोगियों और दर्शकों का धन्यवाद करते हुए अगले वर्ष फिर से रामलीला मंचन करने के संकल्प के साथ आयोजन का समापन किया।
