हनुमानगढ़. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए कवच का काम कर रही है। विपरीत मौसम में फसल खराब होने पर किसानों को फसल का बीमा मिलने पर काफी राहत मिल रही है। बीते बरसों में करोड़ों का क्लेम आने से किसानों को बहुत हद तक राहत मिली है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार आज के समय की बात करें तो खेती कार्य अत्यंत ही जोखिम भरा हो गया है। विभिन्न कारणों से फसल में नुकसान होने पर मुआवजे की मांग होती है। लेकिन नुकसान के बदले मुआवजा आपदा राहत में आने के कारण भरपाई ज्यादा नहीं होती। जबकि फसल का बीमा करवाकर फसल को सुरक्षा कवच दिया जा सकता है। कृषि अधिकारियों के अनुसार सिंचित क्षेत्र के अधिकतर किसान फसल को सुरक्षा कवच के रूप में प्रीमियम को अनावश्यक खर्चा मानते हंै। जबकि बारानी / असिंचित क्षेत्र के किसान जरूरी मानने लगे हैं। जिसका फायदा उन्हें काफी वर्षो से मिल रहा है। प्राकृतिक, वातावरणीय दशाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई केवल फसल बीमा से हो सकती है। फसल बीमा में प्रीमियम की राशि बहुत ज्यादा नहीं होती है। कभी नुकसान होने पर सुरक्षा कवच के रूप में मिलने वाली बीमा क्लेम राशि के विरुद्ध प्रीमियम बहुत मामूली लगता है। फसल बीमा के बिना सरकार से केवल मुआवजा की मांग कर सकते हंै लेकिन मुआवजा से फसल नुकसान की पूर्ण भरपाई नहीं हो सकती। इसलिए किसानों को फसल बीमा करवाने को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। विभाग स्तर पर किसानों से अपील की जा रही है कि वह रबी फसल को सुरक्षा कवर के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत यदि केसीसी है तो अपने बैंक को निवेदन करें। यदि केसीसी नहीं है तो सीधे सीएससी (अधिकृत ई -मित्रा) से बीमा करवाएं। जिससे संभावित नुकसान की स्थिति में किसानों को क्लेम जारी हो सके।इतना प्रीमियम निर्धारित पीएम फसल बीमा के लिए जिले में गेहूं फसल का प्रीमियम 1388.63 पैसे निर्धारित किया गया है। सरसों के लिए 1373.79 पैसे, जौ के लिए 935.61 पैसे , चना के लिए 609.63 पैसे, तारामीरा के लिए 375.42 पैसे और पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा अंतर्गत आलू के लिए 7260 रुपए, मटर के लिए 4275 रुपए, फूलगोभी के लिए 4275 रुपए प्रति हैक्टेयर के हिसाब प्रीमियम निर्धारित किया गया है।31 तक करवा सकेंगे बीमा जिले के किसान रबी सीजन में 31 दिसंबर 2023 तक फसल बीमा करवा सकते हैं। बीते बरसों में हजारों की संख्या में जिले के किसान बीमा करवाते रहे हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में किसानों को अपनी फसलों का बीमा करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि संभावित नुकसान की स्थिति में किसानों को क्लेम मिल सके।