जिला स्तरीय
भामाशाह सम्मान
समारोह 2024 का
आयोजन

हनुमानगढ । शिक्षा विभाग की ओर से टाउन स्थित सेठ राधाकृष्ण बिहानी राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह 2024 का आयोजन किया गया। समारोह में विद्यालयों में राशि दान करने वाले जिले के सभी ब्लॉक के चयनित 24 भामाशाहों एवं 8 प्रेरकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों के रूप में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेन्द्र पारीक, विकास गुह्रश्वता, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पन्नालाल कड़ेला मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सीमा भल्ला ने शिरकत की। अतिथियों ने भामाशाह कृष्णलाल, जगदीश चन्द्र, जसवन्त सिंह, सिंघाराम, राजेन्द्र, उषा डागा, जयसिंह, श्याम सुंदर, नवल किशोर, भंवरलाल, राकेश कुमार, दयाल राम, रोहित निवाद, मोहित साहनी, प्रतीक शर्मा, रजनीश गोदारा, विरेन्द्र मांझू, रामेश्वर लाल, इन्द्र कुमार, ओंकार, सरबती देवी, मथुरा देवी व सुनील कुमार तथा प्रेरक बालकृष्ण व्यास, हनुमान प्रसाद व्यास, कोहर सिंह, ललित भादू, राजेन्द्र, रामकुमार परिहार, इन्द्रजीत सहू व सुभाष गोदारा को शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न प्रदान कर समानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास गुह्रश्वता ने कहा कि कुछ लोगों ने समाज, देश, सभ्यता एवं संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। ऐसे लोगों को भामाशाह की उपाधि दी गई है। सब मिलकर समाज में अगर कुछ काम करते हैं तो समाज उसे अपनाता है और आने वाली पीढिय़ां उससे प्रेरणा लेती हैं। प्रेरणा लेकर उस काम को करती हैं तो तब हमें उसके सार्थक परिणाम मिलते हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज का युग शिक्षा का युग है। शिक्षा के बिना मानव जीवन अधूरा है। आज के इस युग में अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन किसी भी रूप में अगर कोई व्यक्ति चाहे वह समाज की सेवा करे, चाहे वह भामाशाह के रूप में सेवा करे। हमारा भी फर्ज बनता है कि हम भी कुछ न कुछ करके दिखाएं। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे चुपचाप मेहनत करते रहें, यह उड़ान तय करेगी कि आसमां किसका है। क्योंकि मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता। इसलिए हौसलें को बुलंद कर आगे बढ़ते रहें। सीबीईओ सीमा भल्ला ने बताया कि इन भामाशाहों की ओर से लाखों रुपए के कार्य विद्यालय में किए गए। विद्यालय के भौतिक संसाधनों की आपूर्ति भी की गई। उन्होंने बताया कि इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य है कि जिन भामाशाहों ने बिना किसी स्वार्थ के समर्पित होकर संस्था के लिए कुछ किया उन्हें शिक्षा विभाग प्रतीक स्वरूप सांकेतिक रूप से सम्मानित करता है। इससे आने वाली पीढ़ी, विद्यार्थियों में भी इस तरह के संस्कार विकसित हों ताकि वे भी आगे चलकर समाज के लिए कुछ सोचने व करने की क्षमता रखें।
