
हनुमानगढ़। पंजाब के काला सिंधिया नाले से फैक्ट्रियों का दूषित व केमिकल युक्त पानी नहर में छोड़ा जा रहा है। फोटो लखूवाली हेड की है जहां सोमवार को भी पंजाब से काला पानी नहर में चल रहा था। हरिके हेड से राज्य को मिलने वाला पानी बीकानेर फीडर और राजस्थान फीडर के जरिए यहां आता है। विभिन्न शोध में इसमें कई खतरनाक तत्व पाए जाने का खुलासा भी हो चुका है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना पेयजल की दृष्टि से सबसे बड़ी नहर है। मंगलवार को सीएम यहां निरीक्षण करने पहुंचेंगे। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार धरातल पर इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकालेगी। पढ़िए रिपोर्ट। भास्कर संवाददाता| हनुमानगढ़ इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पंजाब की फैक्ट्रियों का कैमिकल युक्त दूषित और काला पानी प्रवाहित हो रहा है।
वर्तमान में आईजीएनपी में लगभग 3 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है जो प्रदूषित और काला है। यही पानी 12 जिलों के लगभग 2 करोड़ लोग पी रहे हैं। वर्षों से आ रहे प्रदूषित पानी को रोकने के लिए कागजी दावे अवश्य किए जा रहे हैं, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। प्रत्येक वर्ष जब आईजीएनपी में आंशिक क्लोजर लिया जाता है तो पानी की भयावता नजर आती है। हर बार जब कैमिकल युक्त पानी आता है तो लोग विरोध भी करते हैं, लेकिन फिर स्थिति जस की तस हो जाती है। सरकार के मंत्री से लेकर जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी कागजी कार्रवाई के दावे करते हैं। इसको रोकने को सरकार गंभीर नहीं है। मंगलवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इंदिरा गांधी नहर परियोजना के दौरे पर रहेंगे। वे पंजाब में हरिके बैराज से लेकर लखूवाली हेड तक आईजीएनपी का निरीक्षण करेंगे। ऐसे में आमजन को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस काले प्रदूषित पानी को देखेंगे तो इसके समाधान के लिए भी कोई सार्थक कदम उठाएंगे।पूर्ववर्ती कांग्रेस के शासन में भी पंजाब को कई बार पत्र लिखे थे। अब ये सरकार भी पत्र लिखने की बात कह रही है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना पेयजल की दृष्टि से सबसे बड़ी नहर है। राजस्थान के 12 जिलों में इसी परियोजना से पेयजल उपलब्ध होता है। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, फलौदी, बालोतरा जिले की 2 करोड़ आबादी को इसी परियोजना का पानी पीने के लिए मिल रहा है। इन दिनों पेयजल आपूर्ति की जा रही है।जल संसाधन विभाग की ओर से रोटेशनवार नहरों को खोला जा रहा है। बड़ी परेशानी यह है कि इस समय आईजीएनपी क्षेत्र के सभी जिलों के लिए केवल पेयजल आपूर्ति के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जलदाय विभाग इसी पानी का भंडारण कर रहा है। लिहाजा यह दूषित पानी आईजीएनपी की प्रत्येक वितरिका से होता हुआ हर शहर व गांव-ढाणी तक पहुंचेगा। मजबूरी में लोगों को यही पानी पीना पड़ेगा। भारत व पंजाब सरकार को पत्र लिख निस्तारण के प्रयास किए जा रहे नहर में जल प्रदूषण रोकने के लिए सैकड़ों पत्र पंजाब सरकार को लिखे हैं। भारत सरकार को भी पत्र लिखे हैं। पंजाब में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी अवगत करवाया है। निश्चित रूप से इसके समाधान के लिए प्रयास होंगे। जल्द ही इसका समाधान कर लिया जाएग राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सेम की समस्या के समाधान के लिए मजबूती से प्रयास किए पंजाब के काला सिंधिया नाले से फैक्ट्रियों का दूषित व केमिकल युक्त पानी नहर में छोड़ा जा रहा है। हरिके हेड से राज्य को मिलने वाला पानी बीकानेर फीडर और राजस्थान फीडर के जरिए यहां आता है। हरिके हेड पर पौंग बांध के अलावा थोड़ा बहुत भाखड़ा और रोपड़ वर्क्स से भी पानी आता है। यह सतलुज और रावी नदियों के बहाव क्षेत्र में बहते हुए हरिके हेड वर्क्स तक पहुंचता है। इन दिनों पौंग बांध से पानी की आवक लगभग एक हजार क्यूसेक हो रही है।
अधिकांश पानी फैक्ट्रियों का ही आ रहा है। जानकारों के अनुसार दूषित पानी हर समय आता है, लेकिन पौंग बांध से ज्यादा पानी आता है तो दूषित पानी मिक्स हो जाता है। इससे पूरा पानी साफ दिखाई देता है, लेकिन अब पौंग बांध से पानी कम छोड़ा जा रहा है। इस कारण दूषित पानी की मात्रा बढ़ गई है। जिले में लखूवाली हेड पर इंदिरा गांधी नहर परियोजना में आ रहा काला पानी।
नानकदेव यूनिवर्सिटी अमृतसर द्वारा मालवा में किए गए शोध के मुताबिक सतलुज नदी में यूरेनियम व लैड जैसे खतरनाक तत्व मौजूद है। ये वो तत्व हैं जो कैंसर, मानसिक बीमारियों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पंजाब की लुधियाना यूनिट ने एक शोध में पाया कि पानी इतना जहरीला है कि उससे लाखों मछलियों की हर साल मौत होती है। वजह, पानी में गंदगी और घातक जहरीले कीटाणु होने की वजह से पानी में ऑक्सीजन की कमी पाई गई।
बाबा फरीदकोट सेंटर में 120 बच्चों पर शोध हुआ। यहां के पानी में 78 फीसदी लैड की मात्रा ज्यादा पाई गई। 98 फीसदी में एल्युमिनियम, 96 फीसदी में मैग्नीज, 93 फीसदी में बेरियम, 34 फीसदी में कैडियम, 19 फीसदी में मर्करी जैसे तत्व पाए गए।
