
हनुमानगढ़। गांव गंगागढ़ से हनुमानगढ़ जंक्शन नाली पुल तक पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई जा रही कारपेट सड़क को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर गुणवत्ता संबंधी आरोप लगाए हैं। आमजन ने मौके पर पहुंचकर विभाग के अधिकारियों के सामने ही कार्य में अनियमितताओं का विरोध जताया और निर्माण की तत्काल जांच करवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा निर्धारित मानकों को नजरअंदाज कर सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीण सुरेंद्र कड़वासरा ने बताया कि इस सड़क पर 20 एमएम पीवीसी और 3 एमएम सील कोट अनिवार्य रूप से होना चाहिए, लेकिन मौके पर यह मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि सड़क निर्माण स्थल पर मीटर से नापकर देखा गया, तो पाया गया कि न तो पीवीसी की परत डाली गई और न ही सील कोट का कार्य किया गया है। इसके विपरीत सीधा कारपेट का माल बिछाकर कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के जेईएन मौके पर मौजूद थे, इसके बावजूद अनियमितताओं को अनदेखा किया गया, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा संदेह उत्पन्न होता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की निगरानी में ही ये अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे जाहिर होता है कि अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य में धन का दुरुपयोग हो रहा है।
सुरेंद्र कड़वासरा ने यह भी बताया कि प्रति किलोमीटर 14 लाख रुपए का बजट स्वीकृत है और लगभग 5 से 7 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार होने का अंदेशा है। ग्रामीणों ने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा इस प्रकार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गहन जांच की जाए और इस कार्य में शामिल अधिकारियों पर विभागीय सख्त कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडी विभाग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि सड़क निर्माण पूरी तरह निर्धारित मानकों के आधार पर ही किया जा रहा है। एईएन श्रवण भूकर ने बताया कि हनुमानगढ़ टाउन से श्रीनगर तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य आदेश 74 लाख रुपए का है। उन्होंने कहा कि डामरीकरण का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है और कार्य की नियमित मॉनिटरिंग विभागीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है। एईएन भूकर के अनुसार प्लांट पर आने वाला पूरा मटीरियल अधिकारियों की निगरानी में ही जांचा जाता है। इसके बाद कनिष्ठ अभियंता के निर्देशन में स्थल पर कार्य आगे बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण में कहीं 21 एमएम और कहीं 24 एमएम माला डाली गई है, जो गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है। भूकर ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विभाग ने स्वयं भी कार्य की जांच करवाई है और निर्माण पूरी तरह नियमों के अनुसार पाया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत और विभागीय पक्ष सामने आने के बाद अब क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां ग्रामीण जांच की मांग पर अड़े हैं, वहीं विभाग अपने कार्य को सही ठहरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या का समाधान तभी होगा जब किसी उच्च स्तरीय समिति द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी। सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता जनता के हितों के विपरीत है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
