
हनुमानगढ़। गौशाला परिसर स्थित कामधेनु सत्संग भवन में चल रही दिव्य श्रीरामकथा अपने अंतिम दिन आध्यात्मिकता, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर गई। स्वर्गीय दुलारी देवी सर्राफ व स्वर्गीय चंदूलाल सर्राफ की पावन स्मृति में उनके पुत्र पंकज सर्राफ द्वारा आयोजित इस कथा महोत्सव में अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पिछले आठ दिनों से रामकथा के आध्यात्मिक प्रभाव ने जहां वातावरण को भक्तिमय बनाया, वहीं सोमवार को कथा के समापन समारोह ने श्रद्धालुओं को भाव-विह्वल कर दिया। अंतिम दिन बाल संत बाबा भोले जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन आदर्शों, धर्म-स्थापना, त्याग, सेवा और समर्पण के दिव्य संदेशों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने हनुमानजी की भक्ति, लक्ष्मण-पराक्रम तथा रावण वध आदि प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए उपस्थित जनसमूह को अध्यात्म की गहराई से अवगत कराया। बाबा भोले जी महाराज ने कहा कि श्रीराम का चरित्र प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आदर्श मार्ग प्रदर्शित करता है तथा उनके आदर्शों का अनुसरण करने से समाज में सद्भाव, प्रेम और सत्य की स्थापना होती है। कथा स्थल पर “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोषों से वातावरण गूंजता रहा। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या सुबह से ही सत्संग भवन में पहुंच गई थी। आयोजक पंकज सर्राफ ने कथा वाचक बाल संत भोले बाबा का दुसाला उढाकर सम्मान किया व आयोजन में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, सेवकों तथा समाजजनों व विशेष कर श्री गौशाला समिति का आभार व्यक्त किया। कथा के समापन पर आरती, प्रसाद वितरण किया गया। कज सुबह हवन यज्ञ का आयोजन किया जायेगे जिसमें सभी श्रदालु आमत्रित है,हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ कािा का सम्मापन होगा उसके बाद विशाल भन्डारे का आयोजन होगा
