
हनुमानगढ़ राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने रोडवेज बसों के संचालन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब डिपो में बैठकर ऑफिस का काम करने वाले ड्राइवर और कंडक्टर को भी बसें चलानी होंगी। डिपो में कार्यरत इन कर्मचारियों को हर महीने कम से कम 3000 किलोमीटर बस चलाने का टारगेट दिया है। यदि कोई टारगेट को पूरा नहीं करता है तो उसकी सैलरी में भी कटौती की जएगी। रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक आदेश के बाद हनुमानगढ़ डिपो में करीब ऐसे 15 ड्राइवर और कंडक्टर हैं, जो ऑफिस काम में लगे हुए थे। जिन्हें अब रूट पर भेजा गया है।
हनुमानगढ़ डिपो में फिलहाल 15 कंडक्टर और ड्राइवर ऐसे हैं, जो अपना मूल कार्य छोड़कर कार्यालय में ड्यूटी कर रहे थे। ये कर्मचारी स्मार्ट कार्ड, पूछताछ, ईटीआईएम (इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन), राजस्व, सांख्यिकी और डीजल जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रशासनिक कार्यों में लगे हुए थे। डिपो के पास इन कार्यों को करने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक कर्मचारी नहीं हैं, जिसके कारण ड्राइवर और कंडक्टरों को इस काम पर लगाया गया था। आदेश में स्पष्ट किया है कि जो परिचालक और चालक मेडिकली अनफिट हैं, उन्हें इस बदलाव में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों के लिए नया मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा और दोबारा स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। यह कदम डिपो के संचालन को पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा: अब रूटों पर बस चलाने की जिम्मेदारी बढ़ने से कर्मचारियों को अपनी नियमित ड्राइविंग/कंडक्टिंग ड्यूटी के अलावा इन प्रशासनिक कार्यों का संतुलन भी बनाए रखना होगा। यह कदम डिपो के संचालन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है, जिससे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और रूटों पर समय पर बस संचालन सुनिश्चित होगा। बंद रूटों पर भी बसों का संचालन हो पाएगा।
इससे यात्रियों को फायदा होगा। ^एमडी के आदेशानुसार अब प्रत्येक कंडक्टर और ड्राइवरों को हर माह 3 हजार किलोमीटर बसों का संचालन करना अनिवार्य होगा। इसे आदेश के अनुसार ऑफिस में बैठे करीब 15 कार्मिकों को रूट पर भेजा गया है। हामिदअली, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज डिपो, हनुमानगढ़ नई नीति से इन 15 कर्मचारियों को भी रूटों पर चलाना सुनिश्चित किया गया है। वहीं डिपो में वर्तमान में कुल 80 बसों का संचालन हो रहा है।
इसमें 108 शैड्यूल चल रहे हैं। इन शैड्यूल के मुताबिक 145 कंडक्टर और 145 ड्राइवर की आवश्यकता है। जबकि डिपो में वर्तमान में 74 कंडक्टर और 90 ड्राइवर है। ऐसे में सभी शैड्यूल को सही तरीके से संचालन के लिए 290 कंडक्टर और ड्राइवर की जररूत है। स्टाफ की कमी के चलते कई रूट बाधित हो रहे हैं।
