
स्थानीय ई ब्लॉक स्थित पुंशी भवन में चल रहे दुर्लभ सत्संग में गीता भवन ऋषिकेश से पधारी दीदी ने शनिवार को सत् चर्चा के दौरान कहा िक भगवद् प्राप्ति का लक्ष्य दृढ़ भाव से बना लेना चाहिए।
यह लक्ष्य निष्काम सेवा व भजन में लगने से प्राप्त हो जाता है। जिस साधक ने भगवान की प्राप्ति का लक्ष्य बना लिया, समझो उसका भगवान के घर में खाता खुल गया। इस खाते को खोलने के लिए साधक के मन में सदा यह भाव रहना चाहिए कि मैं भगवान का हूं तथा भगवान मेरे अपने हैं।
इस बात को स्वीकार करने से भगवान को अत्यंत खुशी होती है जैसे वर्षों से बिछड़ा हुआ बालक मां को मिल जाए। आपने भगवद् प्राप्ति का जैसे ही लक्ष्य बनाया वैसे ही समझो कि आप मां की गोदी में पहुंच गए। हमें जो यह अमूल्य जीवन मिला है वह भजन और सेवा का एक अवसर है। इस अवसर को गवाना नहीं है। मनुष्य जन्म हीरे जैसा अनमोल है। सत्चर्चा के दौरान स्वामी रामसुखदास महाराज द्वारा बताए गए पंचामृत पर विशेष चर्चा हुई। पंचामृत का अभिप्राय है कि हम भगवान के ही हैं। हम जहां भी रहते हैं, भगवान के ही दरबार में रहते हैं। हम जो भी शुभ काम करते हैं, भगवान का ही काम करते हैं।
शुद्ध-सात्विक जो भी पाते हैं, भगवान का ही प्रसाद पाते हैं। भगवान के दिए प्रसाद से भगवान के ही जनों की सेवा करते हैं। गीता जी की दिव्य यात्रा आज: गीता जयंती के शुभ दिवस पर शहर में गीता जी की दिव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभा यात्रा सुबह 9:15 बजे श्री दुर्गा मंदिर विनोबा बस्ती से रवाना होकर हनुमान मंदिर होते हुए पुंशी भवन सत्संग स्थल पर पहुंचेगी। इस शोभा यात्रा का जगह-जगह पर पुष्प वर्षा से स्वागत किया जाएगा।
