
हनुमानगढ़। अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत आने वाले धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं होने को लेकर धाणका जनजाति संघर्ष समिति का जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जारी शांतिपूर्ण धरना अब उग्र स्वरूप लेने की ओर बढ़ रहा है। पिछले 117 दिनों से चल रहे इस धरने के बीच समाज में बढ़ते असंतोष को देखते हुए समिति ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आमरण अनशन प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में समिति ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार को जिला कलेक्टर मार्फत ज्ञापन भी सौंपा है।
समिति का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार का लिखित आदेश न होने के बावजूद धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्र जानबूझकर रोके जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदनकर्ताओं को लगातार अनियमित और अनावश्यक आपत्तियाँ लगाई जा रही हैं, जिससे पात्र परिवारों के आवेदन प्रक्रिया में ही अटक जाते हैं। पहले से लंबित आवेदनों पर भी कार्रवाई न होने से समाज के गरीब, मजदूर और जरूरतमंद वर्ग को शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने बताया कि शासन स्तर पर गठित समिति को आवश्यक दस्तावेज तथा सभी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी गई थीं, लेकिन उसके बावजूद मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।
समिति पदाधिकारियों का कहना है कि धाणका समाज ने वर्षों से राजनीतिक, सामाजिक और गैर-राजनीतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है, परंतु आज उन्हें उन्हीं के मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। संविधान दिवस के अवसर पर अधिकारों के इस खुले उल्लंघन से समाज में असंतोष गहराता जा रहा है। समिति ने प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कहा कि मजबूरीवश अब कठोर कदम उठाने की स्थिति आ गई है।
समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आने वाले एक सप्ताह में प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई तो संघर्ष समिति के सदस्य कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। उनका कहना है कि यह कदम सरकार को चेतावनी देने हेतु उठाया जाएगा कि समाज की सहनशीलता अब समाप्त हो चुकी है।
इधर, धरना 117वें दिन भी जारी रहा। समाज के लोगों ने भाजपा की राज्य एवं केंद्र सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, पार्टी पदाधिकारियों से लेकर सभी स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। समाज प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगामी चुनावों में इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि धाणका समाज अब वार्ड-वार्ड, ढाणी-ढाणी जाकर सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध करेगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
समिति ने सरकार से संवेदनशीलता के साथ मामले का त्वरित समाधान करने की मांग की है ताकि समाज में फैल रहा तनाव और रोष शांत हो सके।
