
राजस्थान में बॉर्डर पार से ड्रग के साथ-साथ हथियारों की तस्करी का सिलसिला जारी है। हनुमानगढ़ पुलिस ने 15 करोड़ की हेरोइन के साथ पकड़े 2 अंतरराज्यीय तस्करों को दबोचा है।
इनके पास से 2 चाइना मेड पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुए हैं। तस्करों का कनेक्शन पाकिस्तान से होने की आशंका है। पुलिस की मानें तो ऐसे ही ऑटोमैटिक हथियारों का इस्तेमाल लॉरेंस और गोल्डी बराड़ जैसी गैंग के गुर्गे कई वारदातों में कर चुके हैं।
2 महीने पहले संगरिया में हुए कारोबारी के मर्डर में भी चाइना-तुर्किए में बने हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस को इन हथियारों की सप्लाई भी किसी गैंग को होने की आशंका है।
पकड़े गए दोनों अपराधियों की दोस्ती हैदराबाद की जेल में हुई थी। इसके बाद ये विदेशी हैंडलर्स से सिग्नल ऐप के जरिए कॉन्टैक्ट में थे। फिलहाल पुलिस इनके नेटवर्क की जांच कर रही है।
एक पंजाब और एक राजस्थान का है आरोपी
23 साल का नासिर पुत्र तैयब मेव राजस्थान के डीग जिले के सरकारी स्कूल के पास जहांतली, सिक्करी का रहने वाला है। नासिर अंतरराज्यीय चोर गिरोह का सदस्य है। उसके खिलाफ चोरी, लूट, डकैती, हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट आदि के दर्जनों प्रकरण दर्ज हैं।
वहीं, 43 साल का भूपेन्द्र सिंह पुत्र अवतार सिंह ढिल्लों पंजाब के भगवानगढ़, संगत जिला बठिंडा का निवासी है। भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ पूर्व में पंजाब, राजस्थान में चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट आदि के करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं।

हैदराबाद जेल में बनाया पूरा प्लान
दोनों ने हैदराबाद जेल में ही राजस्थान-पंजाब बॉर्डर पर तस्करी का नया नेटवर्क खड़ा करने का प्लान तैयार किया था। डीग निवासी नासिर चोरी के आरोप में हैदराबाद जेल में बंद था।
नासिर बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। पढ़ाई छोड़कर वो छोटी-मोटी चोरियां करने लगा। इसके बाद लूट, डकैती और फिर गैंगवार में शामिल होने लगा। इस बीच चोरी के ही एक मामले में उसे हैदराबाद तक गिरफ्तार होकर जाना पड़ा।
यहीं उसकी मुलाकात पंजाब के भूपेंद्र सिंह ढिल्लों से हुई। भूपेंद्र पहले से ही पंजाब-हरियाणा बेल्ट में एक्टिव तस्कर और वेपन का सप्लायर था। दोनों की नशे की लत और अपराधी प्रवृत्ति ने उन्हें तुरंत जोड़ दिया।

अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत लाए गए गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई ने भी पाकिस्तान से हथियार मंगवाने की बात कबूली है।
गैंगस्टर वाली ऐप का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी लगातार विदेश में बैठे एक हैंडलर से निर्देश ले रहे थे, जिसके कहने पर वे हथियार और हेरोइन की डिलीवरी के लिए मूवमेंट कर रहे थे।
इनके मोबाइल में जंगी और सिग्नल जैसे ऐप मिले हैं। इन ऐप का इस्तेमाल लॉरेंस जैसी गैंग करती है। साइबर सेल द्वारा मोबाइल फोरेंसिक में आरोपियों के फोन से विदेशी नंबरों पर बार-बार किए गए कॉल, मैसेज और लोकेशन पैटर्न की पुष्टि हुई है।
