
हनुमानगढ़। केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रमिक कानूनों के विरोध में सोमवार को टाउन स्थित एफसीआई वेयरहाउस के पास सीटू के आह्वान पर मजदूरों ने विशाल विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह ने किया। मजदूरों ने श्रम कानूनों को उनके अधिकारों पर हमला बताते हुए प्रतियां जलाकर अपना कड़ा रोष व्यक्त किया तथा सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में एकत्र हुए मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि ये चार नए श्रमिक कोड मजदूरों की सुरक्षा, स्थिरता और संगठनात्मक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार हैं। सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह ने कहा कि सरकार ने मजदूरों के वर्षों पुराने अधिकारों को समाप्त करते हुए पूंजीपतियों के पक्ष में श्रमिक कानूनों का ढांचा बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इन नए कानूनों से मजदूरों को यूनियन बनाने की आज़ादी सीमित होगी, ठेका प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिक ठेकेदारों की मनमानी का शिकार बनेंगे।
कोषाध्यक्ष बहादुर सिंह चौहान ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह बदलाव मजदूरों के हितों को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार मजदूर संगठनों द्वारा दिए जा रहे विरोध को अनदेखा कर रही है और जनविरोधी नीतियों को लागू करने पर तुली हुई है। चौहान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिए तो मजदूर वर्ग व्यापक आंदोलन करने के लिए तैयार है।
अपने संबोधन में आत्मा सिंह ने ऐतिहासिक उदाहरण भी देते हुए कहा कि 1929 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लाए गए पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिसप्यूट बिल का देशभर में जबरदस्त विरोध हुआ था। शहीद भगत सिंह ने असेंबली में बम विस्फोट कर “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है” का नारा दिया था, जिसके दबाव में ब्रिटिश सरकार को पीछे हटना पड़ा। आत्मा सिंह ने कहा कि आज भी हालात कुछ अलग नहीं हैं और मजदूरों को एकजुट होकर संघर्ष को मजबूत करना होगा।
प्रदर्शन में जुटे मजदूरों ने चार श्रमिक कोड की प्रतियां जलाकर सरकार को चेताया कि यदि मजदूर हितों की अनदेखी जारी रही तो संघर्ष और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप लेगा। सभी ने अपने अधिकारों, न्याय और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
इस मौके पर सीटू जिला अध्यक्ष आत्मा सिंह, जिला कोषाध्यक्ष बहादुर सिंह चौहान, एफसीआई टाउन सचिव हरजी वर्मा, जिला उपाध्यक्ष बसंत सिंह, मेजर सिंह, राम बाबू, श्रीचंद, फिरोज खान, विनीत शाह, शविन्दर सिंह, मोनू, रमनदीप, राजकुमार, सुखजिंदर, मीतू, मीना देवी, गुड्डी देवी, शहजादी सहित अन्य श्रमिक मौजूद थे।
