
नेशनल हाईवे-54 पर अलग-अलग किस्मों के पेड़ काटकर अब एक ही तरह के पौधे लगाने का विरोध हो रहा है। मानव सेवा संस्थान और गोलूवाला के वृक्ष मित्र संस्थान ने नवां रेलवे फाटक से कैंचियां तक निर्माणाधीन हाईवे किनारे जहरीली प्रजाति के पौधे लगाने के विरोध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से इलाके के वातावरण के अनुकूल प्रजातियों के पौधे लगाने की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि हाईवे ऑथोरिटी द्वारा लगाए जा रहे ‘सप्तपर्णी’ (अल्स्टोनिया स्कॉलरिस) पौधे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हैं।
संस्थानों के अनुसार सप्तपर्णी एक जहरीली प्रजाति का पौधा है। इससे न तो पर्यावरण को कोई लाभ मिलता है और न ही यह पक्षियों के संरक्षण में सहायक है। यह पेड़ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जिससे अस्थमा और खुजली जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है।
इससे पहले सड़क बनाने के लिए जो पेड़ काटे गए थे, वे देसी, औषधीय और अधिक ऑक्सीजन देने वाली प्रजातियों के थे। ये प्रजातियां पर्यावरण और पक्षियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
कैंचियां, गोलूवाला से हनुमानगढ़ तक एनएच-54 के निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय प्रजाति के हजारों पेड़ों की कटाई की गई थी। इनमें बरगद, पीपल, नीम, शीशम, बबूल, बेर, जामुन, अर्जुन सहित अनेक प्रकार के वृक्ष शामिल थे। पेड़ों की कटाई से हजारों पक्षियों के आशियाने उजड़ गए और पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ था।
संस्थान सदस्यों ने मांग की है कि हाईवे किनारे बरगद, पीपल, नीम, शीशम, बबूल, बेर, जामुन, अर्जुन, गुल्लर और अन्य औषधीय पौधे लगाए जाएं, जो स्थानीय वातावरण के अनुकूल हों।
इस मौके पर अमित कुमार, रवि, पंकज पारीक, मोहनलाल, दीपक शर्मा, चन्दाराम, नरेश और पवन कुमार सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
