
हनुमानगढ़ में प्रस्तावित रेल बाइपास के लिए गुरुवार को आनंद विहार कॉलोनी पहुंची प्रशासन और रेलवे की टीम को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पैमाइश और मुआवजे को लेकर समझाइश के लिए गए अधिकारियों को विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान जमीन की पैमाइश का काम शुरू नहीं हो सका।
जानकारी के अनुसार, उपखंड अधिकारी (एसडीएम) मांगीलाल सुथार, पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) मीनाक्षी चौधरी, तहसीलदार हरीश सारण सहित अन्य अधिकारी ढिल्लों कॉलोनी पहुंचे थे। उन्होंने कॉलोनीवासियों से बातचीत कर मुआवजा लेने और बाइपास निर्माण कार्य में सहयोग करने की अपील की। हालांकि, लोगों ने किसी भी तरह की मुआवजा राशि लेने से साफ इनकार कर दिया। निवासियों ने अधिकारियों का घेराव करते हुए चेतावनी दी कि आबादी के बीच से बाइपास निकालने नहीं दिया जाएगा।
इस मौके पर मौजूद सागर गुर्जर ने कहा कि बाइपास का मुख्य उद्देश्य शहर की घनी आबादी से रेल यातायात को हटाकर बाहरी हिस्से से ले जाना होता है। लेकिन, यहां पूरे रिहायशी इलाके के बीच से रेलवे लाइन गुजारी जा रही है। इससे सैकड़ों मकानों के उजड़ने और जमीन मालिकों के बेघर होने का खतरा है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन के पास ऐसे वैकल्पिक रूट मौजूद हैं, जहां से बिना किसी बड़े नुकसान के बाइपास निकाला जा सकता है। गुर्जर ने यह भी आरोप लगाया कि बिना नई फिजिबिलिटी रिपोर्ट और ताजा सर्वे के ही अधिसूचना जारी कर दी गई है।
विजय पेशवानी ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित लाइन लगभग तीन हजार की आबादी वाली कॉलोनी को बीच से काट देगी। इससे आमजन की रोजमर्रा की आवाजाही के साथ-साथ एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, शव यात्रा, गैस सिलेंडर ट्रॉली और बस जैसी आवश्यक सुविधाओं पर भी गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन मामूली मुआवजा देकर लोगों की छत छीनना चाहता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कॉलोनीवासियों ने मांग की कि मौजूदा अधिसूचना को तुरंत रद्द किया जाए। उन्होंने नई फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर वैकल्पिक रूट तलाशने और प्रभावित लोगों की आपत्तियां सुनकर ही आगे का निर्णय लेने की अपील की। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें बेघर करने की कोशिश जारी रही, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
