
बच्ची की देखभाल को लेकर स्टाफ से चर्चा करती सीडब्ल्यूसी टीम। भास्कर संवाददाता | हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में पालना स्थल पर पांच दिन पहले छोड़ी गई नवजात बच्ची को बाल कल्याण समिति ने अपने संरक्षण में ले लिया है। हालांकि बच्ची को अभी अस्पताल की एसएनसीयू इकाई में केयर टेकर की निगरानी में रखा गया है। यहां से डिस्चार्ज होने के बाद बच्ची को गोद देने की विधिक प्रक्रिया शुरू होगी।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने बताया कि बच्ची को डिस्चार्ज करने के बाद उसे शिशुगृह में शिफ्ट कर दिया जाता है, जहां से बाल संरक्षण इकाई उसके बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ( CARA) की वेबसाइट पर आवेदन के बाद जांच-पड़ताल के बाद ही उसे किसी परिवार को गोद देने करने की प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि 22 दिसंबर की शाम 4.01 बजे पालना गृह का अलार्म बजने पर लेबर रूम हेल्पर रीना व गार्ड चैना ने मौके पर पहुंचकर देखा तो पालना गृह में एक बच्ची मिली। करीब 2.730 किग्रा वजनी बच्ची का जन्म करीब 6 से 7 दिन होना बताया गया। इनसाइड: अनचाहे शिशुओं को फेंके नहीं इसलिए बनाए पालना स्थल: जिला अस्पताल में मातृ-जननी शिशु यूनिट भवन के बाहर 1 अप्रेल 2016 को आश्रय पालना स्थल की शुरुआत की गई थी।
जिला अस्पताल के पालना स्थल पर अभी तक 9 बच्चे छोड़े जा चुके हैं। पालना स्थल का मकसद यह है कि लोग अनचाहे शिशु को झाड़ियों या नाले में फेंके नहीं बल्कि उसे अस्पताल परिसर में स्थापित आश्रय केंद्र के पालने में छोड़ जाएं। पालने में छोड़ने वाले के चले जाने के दो मिनट बाद घंटी बजेगी। इसके बाद वहां ड्यूटी करने वाले डॉक्टर उस बच्चे को अपने संरक्षण में लेंगे व उसका समुचित इलाज भी करवाया जाएगा।
