
राजस्थान आशा सहयोगिनी चिकित्सा सेवा संघ की ओर से आशा सहयोगिनों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। यह ज्ञापन हनुमानगढ़ विधायक श्री गणेशराज बंसल के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया गया। ज्ञापन में आशा सहयोगिनों की कार्य परिस्थितियों, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
ज्ञापन में संघ सदस्य सीमा भाटी ने बताया गया कि आशा सहयोगिन स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत गांवों एवं शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करती हैं, इसके बावजूद उन्हें कार्य के अनुरूप मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक व मानसिक शोषण हो रहा है। संघ ने मांग की कि आशा सहयोगिनों का न्यूनतम मानदेय बढ़ाकर 24 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए तथा प्रत्येक वर्ष इसमें 500 रुपये की नियमित बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए मांग की गई कि आशा सहयोगिनों को सेवानिवृत्ति के समय राज्य कर्मचारियों की भांति एकमुश्त पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इसके साथ ही ए.एन.एम. की भर्ती प्रक्रिया में आशा सहयोगिनों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने और उनके अनुभव को भर्ती में मान्यता देने की मांग भी की गई, क्योंकि ए.एन.एम. प्रशिक्षण में पहले से ही आशा सहयोगिनों को 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है।
संघ ने यह भी मांग रखी कि आशा सहयोगिनों को दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाए, क्योंकि वे प्रतिदिन फील्ड में कार्य करती हैं। साथ ही विभागीय स्तर पर प्रतिवर्ष आयुष्मान योजना के अंतर्गत उनका बीमा करवाया जाए। महिला पर्यवेक्षक, आशा सुपरवाइजर और आशा कार्यकर्ता की भर्तियों में आशा सहयोगिनों को आरक्षण देने एवं आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट प्रदान करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
आशा सहयोगिनों ने यह भी कहा कि उन्हें राजपत्रित अवकाशों का लाभ मिलना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार की देखभाल कर सकें। इसके अलावा ऑनलाइन कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए टैबलेट या लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विभाग द्वारा आशा सहयोगिनों से ए.एन.एम. और जी.एन.एम. से संबंधित कार्य भी करवाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें उसका उचित लाभ या मान्यता नहीं दी जा रही है, जो भेदभावपूर्ण व्यवहार को दर्शाता है।
संघ ने मुख्यमंत्री से आशा सहयोगिनों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर त्वरित समाधान करने की अपील की। आशा जताई गई कि राज्य सरकार फील्ड स्तर पर कार्य कर रही आशा सहयोगिनों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें भी विकास की मुख्यधारा में शामिल करेगी, जिससे वे और अधिक समर्पण भाव से प्रदेश और देश के विकास में योगदान दे सकेंगी।
इस मौके पर सीमा भाटी, कान्ता शर्मा, रोशनी, सुमन, सुशीला, भवरी, रामी, राजबाला, शारदा, द्रोपती, परमजीत, प्रीत कौर, अनुराधा, शारदा, पुष्पा, कौशल्या व अन्य सदस्य मौजूद थे।
