
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में संचालित राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत आयोजित 10 दिवसीय निशुल्क चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा शिविर में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई है। शिविर में अब तक कुल 90 रोगियों के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जिससे जिले के सैकड़ों लोगों को राहत मिली है। यह शिविर आयुर्वेदिक पद्धति के माध्यम से बवासीर, भगंदर, फिशर सहित अन्य जटिल रोगों के उपचार के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
आज शिविर में समाजसेवी पवन सरावगी द्वारा भर्ती रोगियों के बीच फल वितरण किया गया। फल वितरण के दौरान उन्होंने रोगियों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। समाजसेवी पवन सरावगी ने कहा कि ऐसे चिकित्सा शिविर गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं और समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को सेवा कार्यों में आगे आना चाहिए।
शिविर में चिकित्सकीय सेवाओं के साथ-साथ नर्सिंग, कंपाउंडर एवं परिचारक स्टाफ द्वारा भी पूरे समर्पण भाव से सेवाएं दी जा रही हैं। कंपाउंडर के रूप में महेश, विनय, हरेंद्र, रवि कुमार शर्मा, सत्यप्रकाश, अशोक, पवन, सम्पता, पूजा, सुमन, रजनी, बबीता एवं रीना द्वारा रोगियों की नियमित देखभाल, दवाइयों की व्यवस्था एवं उपचार संबंधी सहयोग किया जा रहा है। इनके प्रयासों से मरीजों को समय पर और व्यवस्थित उपचार मिल रहा है।
परिचारक दल में मनीष, रमेश, राजवीर, सुखदेव, धनराज, श्याम, लखविंद्र कौर, श्रीमती कैलाश एवं नरेश कुमार निरंतर रोगियों की सेवा में लगे हुए हैं। ये सभी परिचारक भर्ती रोगियों की दिन-रात सेवा कर रहे हैं, जिससे मरीजों को पारिवारिक वातावरण का अनुभव हो रहा है।
इसके अतिरिक्त थेरेपिस्ट रवि कुमार का भी शिविर में महत्वपूर्ण सहयोग रहा है, जो पंचकर्म एवं अन्य उपचार प्रक्रियाओं में रोगियों की सहायता कर रहे हैं। वहीं रामचंद्र बरोड एवं संदीप देवर्थ भी शिविर में निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य कर रहे हैं और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सहयोग दे रहे हैं।
शिविर से जुड़े चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पद्धति से बिना किसी गंभीर दुष्प्रभाव के रोगियों का सफल इलाज किया जा रहा है। कम समय में स्वास्थ्य लाभ मिलने से मरीजों में संतोष और विश्वास देखने को मिल रहा है।
