
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने तथा उसमें किए जा रहे प्रस्तावित बदलावों के विरोध में कांग्रेस पार्टी द्वारा केंद्र सरकार एवं भाजपा के खिलाफ चलाया जा रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 5 जनवरी से शुरू हुआ यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। आंदोलन के तहत कांग्रेस द्वारा अलग-अलग दिनों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को प्रदेशभर के सभी जिलों में मौन सत्याग्रह और उपवास का आयोजन किया गया।
हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौन सत्याग्रह किया। कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण ढंग से बैठकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराते नजर आए। सत्याग्रह स्थल पर अनुशासन और शांति का माहौल रहा।
मौन सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी के प्रिय भजन बजाए गए। “रघुपति राघव राजा राम” और “वैष्णव जन तो तेने कहिए” जैसे भजनों की पंक्तियों को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में दोहराया। भजनों के माध्यम से गांधीवादी विचारधारा, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने और उसमें किए जा रहे बदलाव यह स्पष्ट करते हैं कि भाजपा की सोच महात्मा गांधी और उनकी विचारधारा को लेकर क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और उन्हें एक बार फिर बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। मक्कासर ने कहा कि मनरेगा के तहत 60 दिन तक काम बंद रखने की बात की जा रही है, जिससे मजदूरों को मजबूरी में व्यापारियों और ठेकेदारों की शर्तों पर काम करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि भाजपा की विचारधारा नाथूराम गोडसे की विचारधारा है, जबकि कांग्रेस महात्मा गांधी की विचारधारा पर चलती है। इसी कारण यूपीए सरकार के कार्यकाल में योजना को महात्मा गांधी का नाम दिया गया था। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने राइट टू वर्क यानी काम का अधिकार दिया था, जिसे मौजूदा सरकार ने कमजोर कर दिया है।
मनीष मक्कासर ने कहा कि केंद्र सरकार केवल दिखावे के लिए सौ दिन के बजाय सवा सौ दिन काम देने की बात कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि औसतन मजदूरों को तीस से पैंतीस दिन भी काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सवा सौ दिन का दावा केवल कागजी साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत राजस्थान के करीब पांच हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं, जो पिछले दो वर्षों से बकाया हैं। इसके अलावा मनरेगा के बजट में चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी अब राज्य सरकारों पर डाल दी गई है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि मनरेगा को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जिलास्तर के कार्यक्रमों के बाद अब ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर पर भी जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह अभियान 25 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद पार्टी द्वारा नया सर्कुलर जारी कर आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी।
मौन सत्याग्रह में पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र दादरी, पूर्व प्रधान सोहन ढिल्ल, ब्लॉक अध्यक्ष देवीलाल मटोरिया, मनोज सैनी, गुरदीप चहल, विजेन्द्र सांई, प्रेमराज नायक, अमर सिंह मुंडेवाला, शाहरूख रोड़ावाली, जयराम ढुकिया, खुशी अमलानी, रोहित स्वामी, लोकेन्द्र सिंह भाटी, सुरेश चौधरी, संजय मेघवाल, भरतराम मेघवाल, मालचंद राजपुरोहित, यश चिलाना, करणी सिंह राठौड़, जगदीश सिंह राठौड़, विनोद गोस्वामी, इस्माइल खान, मांगीलाल स्वामी, धुरी सैनी, सुभाष घोटिया, राकेश चिलाना, सुखपाल सिंह, बनवारीलाल सुथार, सुधीर गोदारा, पाल सिंह रामपुरिया, मुकेश मिश्रा, आमिर खान, शाहरूख कुरैशी, अनूप चौधरी, गुरलाल मान, सजीव, विनोद जाखड़, गुरप्रीत सिंह, गुरलाल मान, मोहनलाल, सुरेन्द्र खटीक, हरीओम शर्मा, जगदीप रंगारा, शिवभगवान रैगर, विनोद गुरूसर, रामचन्द्र, जयपाल गिरी, मोटाराम, अजय सहारण, सुनील खिचड़, अभिमन्यु सहारण, हरी सिंह, पवन सिहमार, राकेश चावरिया, ओमप्रकाश, गंगाराम, शिव यादव, अमित कुमार, सिमरदीप सिद्धू, भुपेन्द्र सिद्धू, निखिल नैण, विक्रम शर्मा, शिवकुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से सत्याग्रह कर केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया।
