
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में चलाए जा रहे संग्राम अभियान के तहत गांव कानेवाला के चक 2 एचडीपी में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, मनरेगा श्रमिक, कांग्रेस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीणों द्वारा नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष मक्कासर का साहबराम माली ने ग्रामीणों की और से माला पहनाकर एवं पगड़ी पहनाकर जोरदार अभिनंदन करने के साथ हुई।
सभा को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) गरीब, किसान और मजदूर के जीवन की रीढ़ है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के करोड़ों लोगों को रोजगार की गारंटी देकर उनके परिवारों का सहारा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा का नाम बदलकर महात्मा गांधी की सोच और उनके योगदान को मिटाने का प्रयास कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी।
मक्कासर ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण गरीबों के आत्मसम्मान और अधिकार का प्रतीक है। इस योजना से गांवों में रोजगार मिला, पलायन रुका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है और अब नाम बदलने जैसी साजिश रचकर मजदूरों और किसानों के हक पर कुठाराघात कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीब, किसान और मजदूर के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। संग्राम अभियान के माध्यम से गांव-गांव जाकर जनता को जागरूक किया जा रहा है, ताकि सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया जा सके। मक्कासर ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा का नाम बदलने या इसे कमजोर करने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
जनसभा में उपस्थित ग्रामीणों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि मनरेगा ने उन्हें कठिन समय में सहारा दिया है और वे इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, ब्लॉक व मंडल स्तर के पदाधिकारी, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभा के अंत में कांग्रेस नेताओं ने सभी से एकजुट होकर संग्राम अभियान को मजबूत करने और सरकार के फैसलों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
इस मौके पर सुभाष करीर, अनिल महला, पतराम भाटी, पृथ्वीराज सहारण, श्रीराम ढाका, आदराम माली, भेराराम बासीड़ा, सोहनलाल थोरी, कृष्ण खालिया, ओम सिहाग, बालचंद ज्याणी, राजाराम गोदारा, विकास थोरी, सोहनलाल गोदारा, जगसिंह हासलिया, सुभाष धारणिया, लालचंद करीर, प्रहलाद गोदारा, शीशपाल खिचड़, ओमप्रकाश माली, अनिल कड़वासरा, सुरेन्द्र छिम्पा, रायसिंह जांगु, साहबराम जांगु व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
