
हनुमानगढ़। टाउन के सेक्टर नंबर 3 स्थित श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गुरुवार को भक्ति, करुणा और सच्ची मित्रता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। कथा के छठे दिन वाचन आचार्य श्री कृष्ण देव जी महाराज (गोधूलि पुरम, श्रीधाम वृंदावन) ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की दिव्य मित्रता का अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायी प्रसंग प्रस्तुत किया। जैसे ही महाराज जी ने कृष्ण–सुदामा मिलन की कथा प्रारंभ की, पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भावनाओं में डूब गए और वातावरण “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
महाराज जी ने बताया कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता निष्काम प्रेम, समर्पण और सच्चे भावों की प्रतीक है। निर्धन ब्राह्मण सुदामा का अपने बालसखा कृष्ण से मिलने द्वारका जाना और उनके लिए केवल चिवड़े की पोटली साथ ले जाना, यह दर्शाता है कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, वैभव के नहीं। सुदामा की दीन दशा देखकर भी भगवान श्रीकृष्ण का उनके चरण धोना और उन्हें हृदय से लगाना, मानव मात्र के लिए करुणा, समानता और प्रेम का संदेश देता है।
कथा के दौरान जब श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा की पोटली खोलने और बदले में उन्हें वैभवशाली जीवन प्रदान करने का प्रसंग आया, तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। महाराज जी ने कहा कि सच्ची मित्रता में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। कृष्ण–सुदामा की मित्रता हमें सिखाती है कि प्रभु अपने भक्त की भावना को सर्वोपरि मानते हैं और उसके जीवन की सभी कठिनाइयों को हर लेते हैं।
प्रसंग के उपरांत भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे। मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष शंकर गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि कथा का समापन 16 जनवरी 2025 को प्रातः 8.15 बजे हवन-यज्ञ के साथ होगा, जिसके पश्चात भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कथा के समापन पर महाराज कृष्ण देव का आयोजन समिति सदस्य शंकर गुप्ता, श्रीनिवास मितल, गौरव मितल, ललित जैन, अरुण अग्रवाल, मनोहर कोचर, रवी जागिड़, शुभम कांसारिया, अशोक अग्रवाल एवं पुरुषोत्तम शर्मा ने शाल ओढाकर अभिनंदन किया।
