
श्रीगंगानगर की टांटिया यूनिवर्सिटी के कैम्पस में शनिवार को गंगानगर किन्नू फेस्टिवल-2026 हुआ। पहली बार का आयोजन भव्य रहा। इसमें जिलेभर से आए किन्नू उत्पादकों ने स्टॉल लगाई। पूरा पंडाल किन्नू के रंग में रंगा नजर आए। यहां किन्नू उत्पादकों को उत्पादन को लेकर नई जानकारी मिली। उद्घाटन समारोह में गुब्बारे उड़ाकर किन्नू विकास का संदेश दिया गया।
फेस्टिवल के संरक्षक और टांटिया यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया ने कहा- किन्नू ने श्रीगंगानगर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। अब इसे हर साल आयोजित किया जाएगा।

जिलेभर से आए किन्नू उत्पादकों ने किन्नू फेस्टिवल में स्टॉल्स लगाई।
लाइफटाइम अवॉर्ड और किन्नू रत्न सम्मान
फेस्टिवल में लाइफटाइम अवॉर्ड और किन्नू रत्न सम्मान भी दिए गए। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमके कौल को किन्नू के क्षेत्र में योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया।
वहीं लायलपुर फॉर्म हाउस के मनमोहनसिंह नरूला, कृषि पंडित बलवंत सिंह के पौत्र एडवोकेट बिक्रम सिंह, आनंदसिंह कंग और मूलचंद गेरा को किन्नू रत्न सम्मान मिला।
किन्नू क्वालिटी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें स्टॉल में हनुमान प्रथम, अमित सहारण द्वितीय और शीशपाल तृतीय स्थान पर रहे।

किन्नू विशेषयज्ञों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और किन्नू रत्न अवार्ड से नवाजा गया।
किन्नू उत्पादकों की उन्नति के रास्ते खोलेगा फेस्टिवल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृष्ण मुरारी ने कहा- यह फेस्टिवल किन्नू उत्पादकों की उन्नति के नए रास्ते खोलेगा। किसानों के सामने बीज की समस्या पर जोर देते हुए नकली और महंगे बीज की समस्या का जिक्र किया।
विशिष्ट अतिथि अमरचंद बोरड़ ने कहा- महाराजा गंगासिंह की दूरदृष्टि के कारण ही आज रेतीली धरती सोना उगल रही है। किन्नू अब इस इलाके की अर्थव्यवस्था और कृषि की रीढ़ की हड्डी है।
फेस्टिवल में बड़ी संख्या में किसान, स्टूडेंट्स व किन्नू उत्पादकों के साथ-साथ व्यापारी भी मौजूद रहे। इस दौरान संगीत और डांस के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
