
हनुमानगढ़। किसान, मजदूर और आमजन से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को लेकर रविवार को हनुमानगढ़ में बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला। भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू), अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) एवं राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में लगभग 5 हजार किसान-मजदूरों ने जिला कलेक्ट्रेट पर कूंच कर विशाल जनसभा आयोजित की और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बलवान पूनिया ने कहा कि हनुमानगढ़ जिले का किसान, मजदूर और आम जनता पिछले कई वर्षों से गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। मजदूर विरोधी नीतियों, किसानों की उपज की खरीद में अव्यवस्था, फसल बीमा क्लेम की भारी देरी और मनरेगा कार्यों के बंद पड़े होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार लेबर कोड बिलों को मजदूर विरोधी बताते हुए उन्हें वापस लेने, अनुमात्तगढ़ जिले में गेहूं की खरीद एफसीआई के माध्यम से करवाने, समय पर बारदाना उपलब्ध कराने, गेहूं भंडारण के लिए एफसीआई मंडारण स्थलों को पूर्व में चिन्हित करने और खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में न्यूनतम समर्थन मूल्य जमा करने की मांग की गई।
बंद पड़े मनरेगा कार्यों को तुरंत शुरू करने, बीबी जीरामजी बिल वापस लेने, मनरेगा को कानून के अनुरूप संचालित करने तथा मेटों व मजदूरों की बकाया मजदूरी का तुरंत भुगतान करने की मांग उठाई। साथ ही फसल बीमा की बकाया राशि जल्द किसानों के खातों में डालने, जिले की स्पिनिंग मिल हनुमानगढ़ को पुनः शुरू करने और स्मार्ट मीटर योजना पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुख रही।
जनसभा में भूमिहीनों को जमीन देने, राठीखेड़ा एथनोल फैक्ट्री बंद करने और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन को बढ़ाकर 4000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वंचितों को लाभ देने, कैटल शैड व आवास के बकाया भुगतान की तुरंत व्यवस्था, इंदिरा गांधी नहर की बंदी नहीं लेने, किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने और निधि फाइनेंस कर्मचारियों की दादागिरी पर रोक लगाने की मांग रखी गई।
मांगो में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सूअरों की रोकथाम, वर्ष 2020 से 2024 तक के सभी लंबित बीमा क्लेम का भुगतान, जिले की तमाम बीमा योजनाओं का डाटा सार्वजनिक करने, सर्दी से खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी करवाने की मांग भी उठाई। टिब्बी नगरपालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्त जारी करने, टिब्बी तहसील के जलभराव क्षेत्रों में स्थायी पंप लगाने तथा नगर परिषद में शामिल गांवों को स्पष्ट रूप से पंचायत या नगर परिषद की सुविधाएं देने और शहरी मनरेगा तुरंत शुरू करने की मांग भी शामिल रही।
जनसभा को संबोधित करते हुए मंगेज चौधरी ने कहा कि फसल बीमा क्लेम में देरी किसानों के साथ बड़ा अन्याय है और सरकार को तुरंत लंबित क्लेम का भुगतान करना चाहिए।
रामेश्वर वर्मा ने एफसीआई द्वारा दोबारा गेहूं खरीद शुरू करने, 24 घंटे में भुगतान और बारदाना-गोदाम की पूर्व व्यवस्था की मांग रखी।
जगजीत सिंह जग्गी ने राठीखेड़ा एथनोल फैक्ट्री को किसानों के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे बंद करने तथा सर्दी से खराब फसलों की विशेष गिरदावरी की मांग की।
रघुवीर वर्मा ने मनरेगा के बंद पड़े कार्यों पर चिंता जताते हुए कहा कि काम बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष करीब 1 लाख 92 हजार बीघा कृषि योग्य भूमि बड़ी सोलर कंपनियों को दे दी, जबकि आज भी लाखों हेक्टेयर जमीन कृषि योग्य है, जिसे भूमिहीनों को दिया जाना चाहिए।
सीटू जिला सचिव शेर सिंह ने मनरेगा और बीमा क्लेम को लेकर सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। शेर सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय तक नारेबाजी और धरना जारी रहा, जिससे प्रशासन पर दबाव साफ नजर आया। सभा को मनीराम मेघवाल, चंद्रकला वर्मा, कमला मेघवाल, सुरेंद्र शर्मा, बसंत सिंह, बलदेव सिंह मक्कासर ,गुरप्रेम सिंह, सुल्तान सिंह, शिक्षक नेता हनुमान शर्मा, बीएस पेंटर, मोहन लोहरा, देवीलाल, वारिस अली, शिवकुमार प्रधान, हरजी वर्मा, मेजर सिंह, मेवा राम, प्रहलाद बहलोलनगर, संगीता, निरंजन बिश्नोई, वेद मक्कासर, राम चन्द्र, हाकम खान, लाल सिंह, गोपाल बिश्नोई, देवीलाल धोलिपाल, हनुमान प्रसाद सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।
