
हनुमानगढ़। परवीन कुमारी बनाम राजेन्द्र कुमार प्रकरण में न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के गंभीर आरोपों को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। परिवादिया परवीन कुमारी की ओर से अधिवक्ता अमित मदान के माध्यम से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पुलिस थाना महिला, हनुमानगढ़ को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधिवत अनुसंधान कर परिणाम न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए।
न्यायालय में दिए गए कथन में परिवादिया ने बताया कि उसका विवाह 11 मार्च 2010 को राजेन्द्र कुमार के साथ हुआ था। विवाह के समय परिजनों द्वारा हैसियत अनुसार स्त्रीधन दिया गया, इसके बावजूद ससुराल पक्ष द्वारा कम दहेज लाने के ताने दिए गए और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। परिवादिया के अनुसार, आरोपी राजेन्द्र कुमार लालची व झगड़ालू प्रवृत्ति का है, जिसने उसके तथा बच्चों के साथ सौतेला और क्रूर व्यवहार किया। बच्चों के साथ मारपीट, गाली-गलौच और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगाए गए हैं।
परिवादिया ने यह भी बताया कि नौकरी लगने के बाद आरोपी ने मारपीट कर उसका वेतन बैंक खाते से निकलवाया। मार्च 2023 में 14 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर मकान बनाया गया, जिसकी किश्तों का भुगतान परिवादिया द्वारा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कई बार आरोपी को धनराशि दी गई, जिसकी विवरणी दस्तावेजों के साथ संलग्न की गई।
पुलिस रिपोर्ट और प्रस्तुत साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात न्यायालय ने प्रथम दृष्टया अपराध कारित होना पाया और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। बाद में 14 जनवरी 2026 को सहायक अभियोजन अधिकारी की उपस्थिति में पुलिस थाना महिला, हनुमानगढ़ द्वारा आरोपी राजेन्द्र कुमार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 व 115(2) के अंतर्गत आरोप पत्र पेश किया गया। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन कर उक्त धाराओं में प्रसंज्ञान लिया।
आरोपी की ओर से अधिवक्ता सुखवीर सिंह भाम्भू ने जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसे सुनवाई के बाद स्वीकार करते हुए न्यायालय ने 30,000 रुपये की जमानत राशि व समान मुचलके पर आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, परिवादिया की ओर से धारा 210 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रार्थना पत्र पेश किया गया, जिस पर सुनवाई के लिए 7 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
