
हनुमानगढ़। अनुसूचित जनजाति श्रेणी के अंतर्गत धाणका समाज के जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाने के विरोध में धाणका जनजाति संघर्ष समिति द्वारा जिला कलेक्ट्रेट के सामने दिया जा रहा शांतिपूर्ण धरना आज 178वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे समाज के लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
संघर्ष समिति ने ज्ञापन में बताया कि जिला प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार का स्पष्ट या लिखित आदेश नहीं होने के बावजूद धाणका समाज के पात्र लोगों के जाति प्रमाण-पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों पर बार-बार आपत्तियाँ लगाकर प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित किया जा रहा है। इससे समाज के गरीब, मजदूर, किसान एवं जरूरतमंद परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राएँ छात्रवृत्ति, प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं, वहीं युवा सरकारी भर्तियों में भाग नहीं ले पा रहे हैं।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि शासन स्तर पर पहले ही गठित की गई कमेटी को सभी आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट समय रहते सौंप दी गई थीं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और हठधर्मिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि धाणका समाज ने वर्षों से सामाजिक, राजनीतिक और गैर-राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है, लेकिन आज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए उसे सड़कों पर बैठना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद समाज के लोगों ने राज्य एवं केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारियों तक बार-बार अपनी बात पहुंचाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे समाज में गहरा रोष और निराशा व्याप्त है। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने अब भी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आगामी चुनावों में इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को भुगतना पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही धाणका जाति के प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन सहित अन्य कठोर कदम भी उठाए जाएंगे। साथ ही समाज वार्ड-वार्ड और ढाणी-ढाणी जाकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएगा।
