
हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत लोंगवाला की विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों द्वारा जोरदार रोष मार्च निकाला गया। यह रोष मार्च गांव के मुख्य सामुदायिक धर्मशाला (जोहड़ पास) से प्रारंभ होकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने महापड़ाव डालते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पूरा कार्यक्रम ग्राम पंचायत लोंगवाला के सरपंच सुनील क्रांति के नेतृत्व में शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया।
रोष मार्च में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग, युवा एवं गाड़िया लोहार समाज के लोग शामिल हुए। ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे और सार्वजनिक रास्तों को सुचारू रखने, सरकारी भूमि से अतिक्रमण रोकने तथा गाड़िया लोहारों को बेदखल नहीं करने की मांग कर रहे थे। मार्च के दौरान प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी भी की गई, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर महापड़ाव डालकर धरना दिया। इस दौरान सरपंच सुनील क्रांति ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत लोंगवाला में वर्षों से उपयोग में आ रहे सार्वजनिक रास्तों को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पंचायत की राजकीय भूमि पर बार-बार अतिक्रमण कर गलियों को बंद किया जा रहा है, जिससे गांव में आवागमन बाधित होने के साथ-साथ लोकशांति भंग होने की स्थिति बन रही है।
सरपंच ने कहा कि पूर्व में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाया जा चुका है तथा राज्य सरकार की योजना के तहत गाड़िया लोहार समुदाय को पट्टे भी जारी किए गए थे। इसके बावजूद कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा मिलीभगत कर दोबारा अतिक्रमण को संरक्षण देने और गाड़िया लोहारों को बेदखल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की कि माननीय उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद जारी किए गए एकतरफा आदेशों को निरस्त किया जाए और अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।
महापड़ाव के दौरान ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से जिला कलेक्टर से मांग की कि ग्राम पंचायत लोंगवाला के सार्वजनिक मुख्य रास्तों को सुचारू रखा जाए, किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाए तथा गाड़िया लोहार समुदाय को राज्य सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ दिया जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि जिन पट्टों को गलत तरीके से निरस्त किया गया है, उन्हें पुनः जारी किया जाए और इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों एवं व्यक्तियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्यवाही की जाए।
ग्रामीणों ने जिला परिषद सीईओ पर भी भेदभावपूर्ण नीति अपनाने और एक विशेष गुट के पक्ष में कार्य करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सीईओ के निर्णयों से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। ज्ञापन में सहायक विकास अधिकारी पर भी अतिक्रमणकारियों के पक्ष में जांच करने के आरोप लगाते हुए उन्हें पंचायत शाखा से हटाने की मांग की गई।
रोष मार्च और महापड़ाव के दौरान पुलिस एवं प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था रही। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर ज्ञापन प्राप्त किया और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने महापड़ाव समाप्त किया।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो वे भविष्य में और भी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधि मंडल की बैठक जिला क्लेक्टर के साथ हुई, जिसमे सरपंच सुनील क्रांति, पूर्व सरपंच जगदीश सारस्वत, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुमन नायक, साजन लोहरा, रघुवीर नायक, कुलदीप जाखड़, जगजीत जग्गी शामिल थे।
सरपंच सुनील क्रांति ने बताया कि ग्रामीणों के संघर्ष की जीत हुई है और सीओ की हटधर्मिता को तोड़ा गया है, वार्ता में जिला कलेक्टर तुरंत प्रभाव से गाड़िया लोहारो के सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिये व तहसीलदार को निर्देशित किया कि गाव लोगवाला में विशेष शिविर लगाकर गाड़िया लोहारों को सर्टिफिकेट जारी करवाये जाए व कोई भी लाभार्थी इससे वंचित न रहे और माननीय न्यायालय का अंतिम फैंसला आने तक गाड़िया लुहारों को बेदखल नही किया जाएगा। इसी के साथ ही पुरानो नक्शो के आधार पर होने वाली जांचों को पुनः उच्च अधिकारी से करवाने पर विचार किया जाएगा।
