
हनुमानगढ़। मजदूर, किसान और विभिन्न जनसंगठनों के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ धान मंडी से जिला कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकाला गया। मार्च के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सभा आयोजित कर सहामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड, श्रम शक्ति नीति-2025 तथा अन्य आर्थिक नीतियों को जन-विरोधी बताते हुए इन्हें निरस्त करने की मांग उठाई। और अनाज मंडियो में जो लॉटरी निकालकर पांच ब्लाकों में बांटने का काम किया है इसके विरोध में
रोष मार्च धान मंडी से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होता हुआ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “चारों लेबर कोड रद्द करो”, “एफसीआई बचाओ, खाद्य सुरक्षा बचाओ”, “समान काम के लिए समान वेतन लागू करो” जैसे नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पहुंचकर सभा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रमिक नेताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से संगठित व असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर हुई है।
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड रामेश्वर वर्मा ने आरोप लगाया कि लेबर कोड्स के लागू होने से श्रमिकों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उनका कहना था कि न्यूनतम वेतन की सार्वभौमिकता का दावा भ्रामक है और बड़ी संख्या में छोटे प्रतिष्ठानों व श्रमिकों को इसके दायरे से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा फिक्स टर्म रोजगार, ठेका प्रथा के विस्तार और सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश को भी श्रमिक हितों के खिलाफ बताया गया।
रघुवीर वर्मा ने श्रम शक्ति नीति-2025 को भी श्रमिक संगठनों की भूमिका सीमित करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मनरेगा कानून में बदलाव और कार्यदिवसों की अवधारणा में परिवर्तन को ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर प्रहार बताते हुए पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई।
सभा को रामेश्वर वर्मा, बहादुर सिंह चौहान, सुल्तान खान, बसंत सिंह ,, रिछपाल सिंह विनय कुमार गुरप्रेम सिंह। वाली शेर मुकद्दर अली शिवकुमार केंद्रीय कमेटी सदस्य विक्रम सिंह बलदेव सरपंच सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संविधान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी देता है, ऐसे में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अनाज मंडियों में निजी कंपनियों द्वारा गेहूं की खरीद पर रोक लगाने, सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने तथा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग भी उठाई।
अंत में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में चारों लेबर कोड निरस्त करने, श्रम शक्ति नीति-2025 वापस लेने, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, ठेका श्रमिकों को समान वेतन व सुविधाएं देने तथा जन-विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार कर व्यापक संवाद की प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
