
श्रीगंगानगर। दिनों-दिन बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से लोग परेशान हैं। कुत्ते न केवल लोगों को काट रहे हैं, बल्कि सड़कों पर झपट्टा मारकर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। गुरुवार को कुत्ते पकड़ने की मांग को लेकर व्यापारी और डॉग लवर्स कलेक्ट्रेट पहुंचे और अलग-अलग मांगें रखीं।
व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष नीटू सुखीजा ने बताया- आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना लोग कुत्तों के हमलों से जख्मी हो रहे हैं। वाहन चालकों पर कुत्ते झपट्टा मारते हैं, जिससे हादसे होने का खतरा रहता है। व्यापार मंडल लगातार जिला प्रशासन और नगर पालिका से कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराने की मांग कर रहा है, ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिले।
व्यापारियों ने कुत्ते पकड़ने का काम एनजीओ को देने का विरोध किया।
नीटू सुखीजा ने कहा- नगर परिषद हर साल नसबंदी के नाम पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जिला प्रशासन भी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।बेजुबान सेवा फाउंडेशन की फाउंडर वीरशल ने कहा- शहर में कुत्तों की समस्या है, इन्हें पकड़कर नसबंदी की जाए। कुत्तों को बिना जख्मी किए पकड़ा जाए। संस्था संवैधानिक तरीके से कुत्तों का रेस्क्यू करेगी और उन्हें शेल्टर होम में रखेगी। वहां खाने-पीने की पूरी व्यवस्था होगी। बाहर से बुलाए गए एक्सपर्ट ही रेस्क्यू करेंगे, क्योंकि आम तरीके से पकड़ने पर कुत्तों को चोट लगती है या वे मर भी जाते हैं। इसलिए प्रशासन ने कुत्ते पकड़ने के लिए एनजीओ को भी इन्वॉल्व किया है।
सांझी सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर कंवरजीत सिंह बराड़ ने डॉग लवर्स के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा- कुत्तों को सही तरीके से रेस्क्यू कर शेल्टर होम में रखना चाहिए, न कि जख्मी करना। वे बेजुबान हैं। अगर डॉग लवर्स कुतों की समस्या का उचित समाधान करते हैं तो वे उनके साथ है।
