
हनुमानगढ़। जंक्शन नई धान मंडी स्थित श्री करणी माता मंदिर परिसर में चल रही श्री करणी कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक डॉ. करणी प्रताप सिंह ने माता के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए साठिका से जांगलू प्रस्थान की घटना को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। कथा श्रवण के लिए सर्व समाज के महिला-पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कथावाचक ने बताया कि वि.सं. 1475 (1418 ई.) की ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को श्री करणी माता ने साठिका गाँव छोड़ने का निर्णय लिया। उस समय गाँव का पानी खारा था। ग्रामीणों की प्रार्थना पर माता ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि पानी की उपलब्धता बनी रहेगी, लेकिन उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते हुए संयम और सदुपयोग की प्रेरणा दी। यह प्रसंग माता के परोपकारी और दूरदर्शी व्यक्तित्व को दर्शाता है।
डॉ. सिंह ने आगे बताया कि माता अपने ससुर, सास, पति देपा जी और गो-धन के साथ साठिका से प्रस्थान कर जांगलू की ओर बढ़ीं। अपने सेवकों को उन्होंने पशुओं सहित आगे जाने की आज्ञा दी। दोपहर में सपरिवार जांगलू पहुंचने के बाद सूर्यास्त के समय वे जालों के जोहड़ में रुकीं और वहीं निवास की आज्ञा प्रदान की। अगले दिन झोंपड़ी बनाकर वहीं रहने का निर्णय लिया गया। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा के दौरान भजन प्रवाहक किन्नू बना ने भक्ति रस से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। उनके मधुर भजनों पर महिलाएं झूम उठीं और पूरा पांडाल माता के जयकारों से गूंज उठा।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के आगामी दिनों में भी माता के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा स्थल पर सर्वसमाज के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
