
हनुमानगढ़। टाऊन के गुरुद्वारा शहीद बाबा सूखा सिंह बाबा महताब सिंह गुरुद्वारे के सेवादार बाबा जग्गा सिंह मुख सेवादार बाबा जगसीर सिंह (जग्गा सिंह जी) का 29 अप्रैल 2026, बुधवार को स्वर्गवास हो गया। उनके निधन की खबर से क्षेत्र की संगत में गहरा शोक व्याप्त है।इस मौके पर बाबा जोगा सिंहने बताया बाबा जग्गा सिंह लंबे समय से गुरुद्वारा साहिब की सेवा में समर्पित रहे और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में गुरुद्वारा साहिब में कई विकास कार्य हुए, जिससे न केवल भवन का विस्तार हुआ, बल्कि संगत की संख्या और सहभागिता भी लगातार बढ़ी। वे अपनी सरलता, सेवा भावना और समर्पण के लिए संगत में विशेष स्थान रखते थे। जोगा सिंह ने बताया कि बाबा जग्गा सिंह ने अपने जीवन को पूरी तरह से गुरुघर की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने संगत को एकजुट रखने, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन और गुरुद्वारा परिसर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से गुरुद्वारा साहिब क्षेत्र में धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। उन्होंने बताया बाबा जग्गा सिंह ने अन्तिम शवास तक गुरुघर की सेवा में ली,अन्तिम शवास उन्होंने गुरुघर की सेवा के लिए गांव डबली राठान में गुरुघर की सेवा कार्य मे लगे थे । बाबा जोगा सिंह ने आगे बताया शिरोमणी सेवा रतन, शिरोमणी पंथ रतन सिंह साहिब बाबा बलबीर सिंह जी अकाली 96 करोड़ी,14वे मुखी शिरोमणी पंथ अकाली बुढ़ा दल पंजवा तख्त, चलदा वहींर, चक्रवर्ती निहंग सिंह पंजाब के मुख सेवादार बाबा बलवीर सिंह के सानिध्य में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए 8 मई 2026, शुक्रवार को सहज पाठ का भोग और अंतिम अरदास का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से लेकर 1:45 बजे तक गुरुद्वारा साहिब में आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में संगत के शामिल होने की संभावना है।
संगत से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर बाबा जगसीर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए अरदास में शामिल हों। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने बताया कि बाबा जगसीर सिंह की सेवाएं और उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा संगत के दिलों में जीवित रहेंगे।
उनके निधन को गुरुद्वारा साहिब के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। संगत ने उन्हें एक सच्चे सेवक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया है।
