
हनुमानगढ़। राजस्थान में किसानों के हितों के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एक बड़ा और चौंकाने वाला कथित घोटाला सामने आया है। हनुमानगढ़ जिले की पल्लू स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई के दौरान लगभग 9 करोड़ रुपये के फर्जी बीमा क्लेम का मामला उजागर हुआ है। मंत्री की समय रहते हुई इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये की राशि संदिग्ध खातों में जाने से पहले ही रोक दी गई।
यह मामला न केवल बैंकिंग व्यवस्था बल्कि बीमा और राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए 162 कथित फर्जी किसानों के नाम पर बीमा क्लेम तैयार किया गया था।
*कैसे हुआ 9 करोड़ का खेल?*
सूत्रों के अनुसार, SBI पल्लू शाखा में तैनात अधिकारियों और कथित दलालों के गठजोड़ से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। आरोप है कि शाखा प्रबंधक अंकुश मिगलानी सहित अन्य कर्मचारियों ने मिलकर एक सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी कर दी।
*इस कथित घोटाले की कार्यप्रणाली कुछ इस प्रकार सामने आई—*
162 बाहरी व्यक्तियों के बैंक खाते खोले गए
उन्हें बैंकिंग सिस्टम में “ऋणी किसान” के रूप में दर्ज किया गया
फर्जी खसरा नंबर और मुरब्बा नंबर अपलोड किए गए
गैर-मौजूद कृषि भूमि को रिकॉर्ड में दर्शाया गया
खरीफ 2025 की मूंगफली फसल का बीमा कराया गया
सामूहिक रूप से करीब 9 करोड़ रुपये का क्लेम तैयार किया गया
जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर बीमा किया गया, वे वास्तविक रूप से भूमिहीन हैं और उनके नाम पर कोई कृषि भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है।
*गजनेर तहसील की रिपोर्ट ने खोली पोल*
मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्री द्वारा जांच के आदेश दिए गए। गजनेर तहसील प्रशासन की रिपोर्ट ने पूरे मामले की सच्चाई उजागर कर दी।
तहसीलदार की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया—
“सूची में शामिल 162 व्यक्तियों के नाम पर संबंधित क्षेत्रों में कोई भूमि दर्ज नहीं है। सभी खसरा और मुरब्बा नंबर पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।”
इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित संगठित फर्जीवाड़ा है।
*समय रहते रुका 9 करोड़ का भुगतान*
सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह इन 162 खातों में लगभग 9 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम ट्रांसफर होने वाला था। लेकिन मंत्री के अचानक निरीक्षण और हस्तक्षेप के चलते भुगतान को रोक दिया गया।
यदि यह राशि जारी हो जाती, तो यह मामला राजस्थान के सबसे बड़े फसल बीमा घोटालों में शामिल हो सकता था।
*मंत्री का सख्त रुख*
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा— “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित में है, लेकिन कुछ लोग इसे लूट का जरिया बना रहे हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
*मंत्री ने निम्न कार्रवाई के निर्देश दिए हैं—*
संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी
162 फर्जी किसानों के खिलाफ नामजद मुकदमा होगा
संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जाएगा
फर्जी भूमि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच होगी
बीमा कंपनी की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी
उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर निलंबन की सिफारिश होगी
*तकनीकी तौर पर कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?*
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के घोटाले में तकनीकी सिस्टम का दुरुपयोग कर पात्रता बनाई जाती है। इसमें आमतौर पर ये तरीके अपनाए जाते हैं—
खातों की श्रेणी में हेरफेर
सामान्य खातों को “ऋणी किसान” श्रेणी में डालना
फर्जी भूमि डेटा अपलोड
खसरा, जमाबंदी और मुरब्बा नंबर बनाकर सिस्टम में डालना
बीमा पोर्टल एंट्री
फर्जी किसानों को बीमा पोर्टल पर पंजीकृत करना
सामूहिक क्लेम बनाना
फसल नुकसान दिखाकर एक साथ क्लेम तैयार करना
त्वरित निकासी की तैयारी
पैसा आते ही तुरंत निकालने की योजना
*बड़ा सवाल: सिस्टम में सेंध कैसे?*
यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
बिना भूमि सत्यापन के बीमा कैसे पास हुआ?
बैंक ने ऋणी किसान की पात्रता कैसे मान ली?
बीमा कंपनी ने दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की?
फर्जी खसरा नंबर सिस्टम में कैसे स्वीकार हो गए?
क्या यह केवल एक शाखा का मामला है या बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
*सवाल-जवाब*
प्रश्न: क्या 162 किसानों का बीमा SBI पल्लू शाखा से हुआ?
उत्तर: हां, शाखा प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की।
प्रश्न: क्या ये सभी किसान ऋणी थे?
उत्तर: बैंक मैनेजर ने इन्हें ऋणी किसान बताया।
प्रश्न: क्या इनके पास कृषि भूमि का रिकॉर्ड है?
उत्तर: जांच में कोई वैध भूमि रिकॉर्ड नहीं मिला।
प्रश्न: खसरा और मुरब्बा नंबर सही थे?
उत्तर: सभी नंबर फर्जी पाए गए।
प्रश्न: क्या बीमा क्लेम जारी हो चुका था?
उत्तर: नहीं, मंत्री के हस्तक्षेप से पहले ही रोक दिया गया।
प्रश्न: क्या बैंक अधिकारी जांच के दायरे में हैं?
उत्तर: हां, उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
*प्रशासनिक हलकों में हड़कंप*
इस बड़े खुलासे के बाद बैंकिंग, कृषि और राजस्व विभागों में हड़कंप मच गया है। राज्य स्तर पर भी इस मामले की रिपोर्ट तलब किए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं हो सकता और अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की जांच हो सकती है।
