
हनुमानगढ़। सामाजिक समरसता न्याय मंच की ओर से गुरुवार को जंक्शन में महात्मा ज्योतिबा फुले की 197वीं जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को आगे आकर महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के जीवन से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। उनके बताए मार्ग को जीवन में अपनाना चाहिए।
मंच अध्यक्ष रामप्रताप भाट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों के रूप में उद्योगपति शिवरतन खड़गावत, टिब्बी नगर पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि कुलवंत सुथार ने शिरकत की। अतिथियों ने महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र के समक्ष माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले दलितों, पिछड़ों के मसीहा थे। उन्होंने दलितों, पिछड़ों को शिक्षा का अधिकार दिलाया। अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका बनाकर नारी शिक्षा की अलख जगाई। अनेकों पाठशाला खोली तथा सत्यशोधक समाज की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे आकर महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले के जीवन से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। उनके बताए मार्ग को जीवन में अपनाना चाहिए। मंच जिलाध्यक्ष रामप्रताप भाट ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले मानव मात्र की समानता के समर्थक थे। वह जाति, पंथ, संप्रदाय, लिंग, भाषा, क्षेत्र आदि के नाम पर होने वाले भेदभाव के प्रबल विरोधी थे। बालिका शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने वंचित, शोषित और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अपना संपूर्ण जीवन अर्पित किया।
महात्मा ज्योतिबा फुले ने युवा वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा की अलख जगाई। उन्होंने कहा कि समाज में फैली कुप्रथा को समाप्त करने में युवा अपना योगदान दें। कार्यक्रम में मनीराम कारगवाल, कृष्ण गहलोत, दुर्गादत्त सैनी, विनोद कंडा, डॉ. शांतिलाल जावा, राजेन्द्र वर्मा, विनोद आनंद, राजेन्द्र निमिवाल, बलवीर सैनी, कुलदीप औलख, प्रेमराज नायक, भारतेन्दु सैनी, गजेन्द्र गहलोत, विजय भाट, रामदयाल लिम्बा, विक्रम रामगढिय़ा, सरपंच रोहित स्वामी आदि मौजूद रहे।
