मनरेगा शुरू करने और 700 रुपये रोजाना मजदूरी की मांग,जिला परिषद घेराव

श्रीगंगानगर।(भटनेर एक्सप्रेस)ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की मजबूरी अब सड़क पर उतर आई है। श्रीगंगानगर जिले में मनरेगा योजना दो साल से पूरी तरह बंद पड़ी होने के कारण सैकड़ों परिवार भुखमरी और आर्थिक संकट की कगार पर पहुंच गए हैं। आज श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने जिला परिषद कार्यालय का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया।अखिल भारतीय खेत एवं मजदूर यूनियन और सीटू के संयुक्त तत्वावधान आयोजित कि प्रदर्शन में कमरेड मोहनलाल,वकीलसिंह, हरकेवलदीपसिंह, खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की राज्य अध्यक्ष दुर्गा स्वामी, उपाध्यक्ष भूरामल स्वामी एडवोकेट, जिलाध्यक्ष पालाराम,सचिव जीतसिंह,साधुराम,प्रकाश,दयादेवी,कैलाश,मोनिका,कमला देवी,इकविंदर,मनप्रीतकौर, नौजवान सभा के देवीलाल,आईडीपीके नरेश शर्मा, गणपतरामके नेतृत्व में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर शामिल हुए इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं।जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष कविता और सचिव सुनीता कुमारी ने अपनी टीम के साथ धरने को समर्थन दिया। प्रदर्शन के दौरान धरना स्थल पर घोषणा की गई थीअब 15 जून के बाद पंचायतों का घेराव किया जाएगा।प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ मनरेगा को तुरंत शुरू करने की मांग की बल्कि दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये करने, साल में कम से कम 200 दिन का काम और कार्यस्थल पर छाया, पीने का पानी तथा मेडिकल सुविधा जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।अखिल भारतीय खेल एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा स्वामी ने बताया कि दो साल से मनरेगा बंद पड़े होने के कारण घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है, अनाज-रोटी का संकट गहरा गया है और बढ़ती महंगाई में 300-400 रुपये की निजी मजदूरी से परिवार का पेट भी नहीं भर पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर रोजाना 700 रुपये मजदूरी मिल जाए तो कम से कम घर का खर्चा कुछ हद तक संभाला जा सकता है।मनरेगा मजदूर महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। न तो समय पर काम मिलता है और न ही भुगतान सही समय पर होता है। कई महिलाएं घर की मुख्य आय स्रोत बन चुकी हैं क्योंकि उनके पति या तो बेरोजगार हैं या दूसरे राज्यों में मजदूरी करने चले गए हैं। ऐसे में मनरेगा बंद होने का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है। कुपोषण बढ़ा है, कर्ज का बोझ बढ़ा है और परिवारों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई है।प्रदर्शनकारियों ने जिला परिषद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और साफ चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
