
राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी ने छात्र-छात्राओं को बताए को सफलता के मंत्र
हनुमानगढ़।(भटनेर एक्सप्रेस)श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की ओर से सोमवार को विभाग के पूर्व छात्र एवं राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खिलाड़ी सुरेश कुमार के साथ प्रेरणादायक संवाद एवं गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को खेलों में उपलब्ध अवसरों, चुनौतियों तथा सफलता के लिए आवश्यक गुणों से परिचित कराना था। अपने संबोधन में सुरेश कुमार ने विद्यार्थी जीवन से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक की संघर्षपूर्ण यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि निरंतर अभ्यास, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सकारात्मक सोच के बल पर उन्होंने ताइक्वांडो में कई उपलब्धियां हासिल कीं तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही इसकी वास्तविक कुंजी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने और स्वस्थ व अनुशासित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। साथ ही बताया कि खेल समय प्रबंधन, नेतृत्व कौशल, निर्णय क्षमता, टीम भावना और मानसिक दृढ़ता जैसे गुणों का विकास करते हैं। गेस्ट लेक्चर के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों में करियर निर्माण, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल छात्रवृत्तियों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, खेल कोटे से सरकारी सेवाओं के अवसर और रोजगार की संभावनाओं से जुड़े प्रश्न पूछे। सुरेश कुमार ने अपने अनुभवों के आधार पर सभी सवालों के उत्तर देते हुए उनका मार्गदर्शन किया। विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश जुनेजा ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास निर्माण का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निरंतर प्रोत्साहित करता है। विभागाध्यक्ष डॉ. रमनदीप कौर ने छात्र-छात्राओं को सुरेश कुमार की शैक्षणिक एवं खेल उपलब्धियों से अवगत कराते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं की सफलताएं वर्तमान छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होती हैं। ऐसे संवाद छात्र-छात्राओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक डॉ. अवधेश शर्मा ने कहा कि पूर्व छात्र-छात्राओं के अनुभव वर्तमान छात्र-छात्राओं के लिए अमूल्य धरोहर हैं और ऐसे कार्यक्रम उन्हें नई दिशा, प्रेरणा और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
