
राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के प्रशिक्षण शिविर में संघर्ष तेज करने की रणनीति तय, संगठन विस्तार पर जोर
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन हनुमानगढ़ की ओर से मंगलवार को फूडग्रेन धर्मशाला में जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर एवं बैठक का आयोजन किया गया। शिविर में जिलेभर से आए खेत एवं ग्रामीण मजदूरों, यूनियन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में मनरेगा की वर्तमान स्थिति, ग्रामीण रोजगार, मजदूर अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा भविष्य के संघर्षों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मनरेगा कानून को पुनः प्रभावी रूप से बहाल करने, वर्ष में 200 दिन रोजगार और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन की शुरूवात जिला उपाध्यक्ष मनीराम मेघवाल ने संगठन का झण्डा लहराकर की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शिविर को संबोधित करते हुए यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजलाल भारती ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, खेत मजदूरों और महिलाओं के लिए जीवनरेखा का कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाई जा रही नई व्यवस्थाएं मनरेगा को कमजोर करने की दिशा में कदम हैं। उन्होंने कहा कि यह गांवों से रोजगार छीनने और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करने की योजना है। मनरेगा ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन यदि इसे कमजोर किया गया तो सबसे अधिक नुकसान गरीब और श्रमिक परिवारों को होगा। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में मनरेगा ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ा सहारा बनी हुई है। ऐसे समय में रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करना गरीबों के हितों के विपरीत है। उन्होंने मजदूरों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गा स्वामी ने कहा कि राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की प्रमुख मांग मनरेगा कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप बहाल करना, मजदूरों को 200 दिन रोजगार उपलब्ध कराना तथा न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मजदूरी दर बढ़ती महंगाई के मुकाबले बेहद कम है, जिससे मजदूर परिवारों का जीवनयापन कठिन होता जा रहा है। मजदूरों को सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए मजदूरी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। दुर्गा स्वामी ने कहा कि आने वाले समय में मनरेगा को मजबूत बनाने, रोजगार के अधिकार की रक्षा करने और मजदूरों की मांगों को लागू करवाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव बैठकों का आयोजन किया जाएगा तथा अधिक से अधिक मजदूरों को संगठन से जोड़कर संघर्ष को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही मजदूरों की ताकत है और सामूहिक संघर्ष से ही अधिकार हासिल किए जा सकते हैं। जिला अध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। ऐसे में मनरेगा जैसी योजनाएं गरीब परिवारों के लिए संबल का काम कर रही हैं। यदि इस योजना को कमजोर किया गया तो गांवों से पलायन बढ़ेगा और मजदूरों की आर्थिक स्थिति और खराब होगी।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से प्रत्येक गांव में मजदूरों को जागरूक कर संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। जिला महासचिव प्रहलाद बहलोलनगर ने कहा कि मजदूर वर्ग के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूनियन मजदूरों की आवाज को मजबूती से उठाती रही है और आगे भी उनके हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि बैठक में आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों, जनजागरण अभियानों और संगठन विस्तार की विस्तृत कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू करवाने, 200 दिन रोजगार और 600 रुपये मजदूरी की मांग को लेकर तीखे संघर्ष किए जाएंगे। जिसके अगले चरण में 25 जून 2026 को जिला परिषद हनुमानगढ़ पर विशाल प्रदर्शन किया जायेगा, जिसमें 10 हजार से ज्यादा मजदूर भाग लेगे। इसके लिए पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार प्रसार कियाा जायेगा। अंत में सभी उपस्थित मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि मजदूर हितों की रक्षा, मनरेगा की मजबूती और रोजगार के अधिकार के लिए एकजुट होकर संघर्ष को तेज किया जाएगा। कार्यक्रम में पोखर राम नायक, रामचन्द्र बावरी, मेवाराम, कृपाराम सिंघमार, रघुवीर वर्मा, बनवारीलाल, जरनैल सिंह, सुरेन्द्र टिब्बी, छगनलाल, पुष्पा शाक्य, सरोज, निर्मला व बड़ी संख्या में मजदूर, यूनियन पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
