
आरटीआई कार्यकर्ता रामफल बिश्नोई ने खोला पर्दा, कई कर्मचारी निर्दोष बताए
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) नगर विकास न्यास के चर्चित डबल पट्टा प्रकरण में कथित लापरवाही और गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पिछले सप्ताह जयपुर में राज उन्नति बैठक के दौरान की गई कार्रवाई अब खुद विवादों के घेरे में आ गई है।मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर विकास न्यास के सचिव अशोक कुमार असीजा, सहायक अभियंता संदीप वर्मा, पटवारी रतनलाल तथा कर्मचारी जितेंद्र सिंह और सुनील कुमार को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता रामफल बिश्नोई का कहना है कि इस पूरे निलंबन मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।आरटीआई कार्यकर्ता रामफल बिश्नोई के अनुसार पटवारी रतनलाल को पूरी तरह गलत तरीके से निलंबित किया गया है। उनके सर्विस रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि चहल चौक के समीप विवादित भूमि पर डबल पट्टा जारी किए जाने के समय रतनलाल नगर विकास न्यास में नियुक्त ही नहीं थे। इस पट्टे की सारी प्रक्रिया उनके अतिरिक्त पटवारी कार्यभार संभालने से बहुत पहले ही पूरी हो चुकी थी।इसी तरह कर्मचारी जितेंद्र सिंह और सुनील कुमार की इस मामले में कोई सक्रिय भूमिका नहीं बताई जा रही है। दोनों सामान्य क्लर्क हैं जिनका मुख्य काम विभिन्न अधिकारियों और शाखाओं से प्राप्त रिपोर्टों को मार्गदर्शन के लिए सचिव को भेजना तथा सचिव के निर्देशानुसार कार्य करना होता है। जितेंद्र सिंह ने मौका रिपोर्ट, एलएओ, एटीपी और अकाउंट शाखा से प्राप्त रिपोर्टों को पत्रावली सहित उचित मार्गदर्शन के लिए सचिव को भेजा था। वहीं सुनील कुमार ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इस भूखंड का डिमांड नोटिस तैयार किया था इन दोनों की भूमिका पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में सिर्फ इन्हीं तक सीमित थी।रामफल बिश्नोई ने डबल पट्टा प्रकरण की शुरुआती रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए हैं। मई 2023 में संविदा सर्वेयर वेणुगोपाल यादव और दूसरे सर्वेयर अमरचंद ने चहल चौक के नजदीक इस भूखंड पर तामीर (निर्माण) होने की रिपोर्ट दी थी। लेकिन मात्र तीन-चार महीने बाद वेणुगोपाल यादव ने अकेले ही उसी भूखंड को खाली बताते हुए नई रिपोर्ट भेज दी।उनके मुताबिक इस पूरे प्रकरण में एक अन्य पटवारी , सहायक अभियंता एटीपी अमित जाखड़ अन्य अधिकारियों कि भुमिका संदिग्ध रही है न्यास में पट्टा जारी करने की पूरी प्रक्रिया के बाद सचिव द्वारा पत्रावली का गहन अवलोकन किया जाता है और फिर संबंधित शाखाओं से दोबारा परीक्षण करवाया जाता है। फिर भी इस मामले में नियम-कायदों की अनदेखी हुई और कई तथ्य छिपाए गए।मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद निलंबन की कार्यवाही में भी अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी कर दी गई। वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई जबकि निर्दोष पटवारी और कर्मचारियों को इस मामले में घसीट लिया गया।सामाजिक कार्यकर्ता रामफल बिश्नोई ने जिला प्रशासन से मांग की है संविदा सर्वेयर वेणुगोपाल यादव और सर्वेयर अमरचंद की गहन जांच की जाए ताकि असली दोषियों को उनके किए की सजा मिल सके और निर्दोष कर्मचारियों को इस मामले से मुक्त किया जा सके।
