
श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस)कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का उद्देश्य श्रमिकों एवं उनके परिवारों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान में निजी अस्पतालों में रेफरल एवं चिकित्सा दावों की प्रक्रिया इतनी जटिल होती जा रही है कि आम श्रमिक, अनपढ़ मजदूर तथा गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए इसका पालन करना अत्यंत कठिन हो गया है।इस विषय के जानकारी एक सरकारी कर्मचारियों ने अपना नाम न छापने की छत पर बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों में प्रदर्शित सूचनाओं के अनुसार रेफरल, ओपीडी बिल, आईपीडी बिल तथा आपातकालीन भर्ती के दावों के लिए अनेक प्रकार के दस्तावेजों की मांग की जाती है। इनमें रेफरल पर्ची, डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट, एनएसी, डॉक्टरों के हस्ताक्षर एवं मोहरयुक्त प्रमाण पत्र, दवाओं के मूल बिल, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटोकॉपी तथा अन्य कई दस्तावेज शामिल हैं।उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज या उसका परिवार पहले से ही मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहा होता है। ऐसे समय में उनसे इतनी अधिक कागजी औपचारिकताओं की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। विशेषरूप से अनपढ़, ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के श्रमिकों के लिए यह प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाती है।मामले में अहम सवाल उठा है कि- क्या एक साधारण मजदूर, जो बीमारी से परेशान है, विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाकर, फोटोकॉपी करवाकर, प्रमाणित प्रतियां जुटाकर तथा हर दस्तावेज पर आवश्यक हस्ताक्षर एवं मोहर लगवाकर समय पर उपचार प्राप्त कर सकता है? यदि किसी दस्तावेज में छोटी सी कमी रह जाए तो मरीज के दावे अथवा रेफरल में बाधा उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है।उल्लेखनीय है कि ईएसआईसी की स्थापना सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि रेफरल एवं दावा प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं मरीज हितैषी बनाया जाए। डिजिटल सत्यापन, एकल खिड़की व्यवस्था(सिंगल विंडो) हेल्प डेस्क सुविधा तथा पहले उपचार, बाद में औपचारिकता जैसे सिद्धांतों को लागू किया जाना चाहिए, विशेषकर गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में।इस बारे में मांग की जा रही है कि संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिध ईएसआईसी की वर्तमान रेफरल एवं दावा प्रक्रिया की समीक्षा कर इसे सरल बनाएं ताकि कोई भी जरूरतमंद श्रमिक केवल कागजी कमियों के कारण उपचार से वंचित न रह जाए।मजदूर को समय पर इलाज मिले, कागजों के बोझ तले उसका अधिकार दबना नहीं चाहिए।
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