

आचार्य श्री देवीदान जी गौश्री ने धर्म, सत्य और वैराग्य का दिया संदेश
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) जंक्शन स्थित जाट भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा की शुरुवात मुख्य यजमान अमित चौधरी ने सपत्नी विधिवत पूजा अर्चना के साथ की। परम पूज्य आचार्य श्री देवीदान जी गौश्री ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों में महाभारत के अंतिम प्रसंगों, पांडवों के स्वर्गारोहण तथा राजा परीक्षित की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान पूरा पांडाल श्रद्धा और भक्ति के वातावरण से सराबोर रहा। आचार्य श्री ने कहा कि महाभारत युद्ध के उपरांत जब पांडवों ने अपना राजपाट त्याग दिया तो उन्होंने सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर हिमालय की ओर स्वर्गारोहण यात्रा प्रारंभ की। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने त्याग, तप, वैराग्य और धर्म के सर्वोच्च आदर्श स्थापित किए। उन्होंने बताया कि युधिष्ठिर ने जीवनभर सत्य, न्याय और धर्म का पालन किया, जिसके कारण वे अपने शरीर सहित स्वर्ग लोक पहुंचे। वहीं अन्य पांडवों के मार्ग में गिरने के पीछे उनके जीवन की सूक्ष्म कमजोरियों का उल्लेख करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि मनुष्य को अहंकार, मोह और अभिमान का त्याग कर सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। कथा के दौरान आचार्य श्री ने राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को जब सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला तो उन्होंने समस्त सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगा तट पर महर्षि शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। सात दिनों तक भगवान की कथा सुनकर उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त किया और मोक्ष की प्राप्ति की। आचार्य श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जिसका श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र और सार्थक बनाता है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष, भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा श्रवण कर धर्म और अध्यात्म का संदेश ग्रहण किया। आयोजन समिति ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ प्रतिदिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति में जारी है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, भक्ति, सदाचार और भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है। समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से परिवार सहित कथा में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया। कथा का समापन 5 जुलाई को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ एवं पूर्णाहुति के साथ होगा।

