एमएसपी पर गेहूं खरीद में फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच की मांग

हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) जिले के किसानों ने बुधवार को अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद में कथित फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों और व्यापारियों ने संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से किसानों के नाम पर गेहूं बेचकर सरकार की एमएसपी योजना और बोनस का अनुचित लाभ उठाया है, जिससे वास्तविक किसान अपने अधिकार से वंचित रह गए।
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा एमएसपी और प्रति क्विंटल 150 रुपये का बोनस किसानों के हित में दिया जाता है। यदि किसान के अलावा कोई अन्य व्यक्ति, व्यापारी या संगठित समूह फर्जी तरीके से एमएसपी पर गेहूं बेचता है, तो यह गंभीर अनियमितता है और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। किसानों का कहना है कि कथित फर्जीवाड़े के कारण अनेक किसानों को अपना गेहूं मजबूरी में कम कीमत पर बेचना पड़ा, जबकि उन्हें सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल सका।
किसानों ने मांग की कि गैरकानूनी तरीके से एमएसपी पर बेचे गए गेहूं को जब्त किया जाए तथा बोनस राशि का दुरुपयोग करने वालों से दोगुनी राशि की वसूली की जाए। उनका आरोप है कि कुछ व्यापारियों ने किसानों को पहले समर्थन मूल्य के बराबर भुगतान का आश्वासन देकर गेहूं उठवाया, लेकिन बाद में उन्हें उचित भुगतान नहीं मिला। किसानों का कहना है कि यदि इस प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं होता तो जिले के किसानों का पूरा गेहूं समर्थन मूल्य पर बिक सकता था।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि इस प्रकार की अनियमितताएं केवल इस वर्ष ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में भी होती रही हैं। किसानों ने गत वर्ष हुई गेहूं खरीद और नरमा खरीद की भी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
इसके साथ ही किसानों ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अटल भूजल योजना के तहत निर्मित डिग्गियों की लंबित अनुदान राशि शीघ्र किसानों के खातों में जारी करने की मांग भी उठाई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा समय देने के बावजूद अब तक किसानों को राहत नहीं मिली है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि गेहूं खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच और डिग्गियों की अनुदान राशि जारी करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से किसानों के हितों की रक्षा करते हुए दोनों मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।
