
34 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुईं शारीरिक शिक्षिका बनेश पूनिया
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) गांव डबलीराठान के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को शारीरिक शिक्षिका बनेश पूनिया के सेवानिवृत्ति उपलक्ष्य में विदाई समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विद्यालय परिवार ने बनेश पूनिया एवं उनके पति अमीलाल राव का राजस्थानी साफा पहनाकर व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मान किया। समारोह को संबोधित करते हुए एसीबीईओ रोहिताश कड़वासरा ने कहा कि नारी सशक्तिकरण की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन उसका वास्तविक स्वरूप तभी दिखाई देता है जब महिलाएं अपने कार्यांे से समाज में प्रेरणा बनती हैं। उन्होंने कहा कि शेखावाटी वीरों की धरती है, जहां व्यक्ति के कर्म और उपलब्धियां ही उसकी पहचान बनते हैं। उन्होंने कहा कि बनेश पूनिया ने अपने कार्यकाल में बालिकाओं को यह विश्वास दिलाया कि वे भी जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज सुविधाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई बार अवसरों का सही उपयोग नहीं हो पाता। समाज में लड़कियों का बड़ा हिस्सा भय और संकोच में बीत जाता है, जबकि उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढऩा चाहिए। बनेश पूनिया इसका सशक्त उदाहरण हैं। रोहिताश कड़वासरा ने कहा कि नौकरी तो हर अधिकारी और कर्मचारी करता है और एक दिन सभी सेवानिवृत्त होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके जीवन और कार्यांे से कितने लोग प्रेरित हुए। यदि किसी व्यक्ति को आपके कार्यांे से आगे बढऩे की प्रेरणा मिली, तो वही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने छात्राओं से खेलों के साथ-साथ शिक्षा के अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आह्वान किया। इस मौके पर बनेश पूनिया ने विद्यालय के प्रवेश द्वार के निर्माण के लिए 2 लाख रुपए का योगदान देने की घोषणा की, जिसकी उपस्थित जनों ने सराहना की। उल्लेखनीय है कि बनेश पूनिया ने 34 वर्ष की राजकीय सेवा के दौरान खेलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जिला कलक्टर की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय की 13 वर्ष आयु वर्ग की बास्केटबॉल टीम विजेता रही, जबकि लगातार 15 वर्षांे तक विद्यालय की बास्केटबॉल टीम राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही। उनके प्रशिक्षण में कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। इसके अलावा उन्हें विभिन्न प्रतियोगिताओं में चयन समिति की सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं।
