
पिछले साल अतिवृष्टि में बेघर हुए थे डेढ़ सौ परिवार
ग्राम पंचायत ने घग्घर नदी तक ड्रेनेज/पाइपलाइन निर्माण की मांग दोहराई
हनुमानगढ़ (भटनेर एक्सप्रेस) राजस्थान में मानसून की एंट्री के साथ ही हनुमानगढ़ जिले के निकटवर्ती गांव मक्कासर के ग्रामीणों की चिंता भी बढऩे लगी है। पिछले वर्ष अतिवृष्टि के कारण गांव में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे, जिससे करीब 150 परिवार बेघर हो गए थे। अब जबकि जिले में भी जल्द मानसूनी बारिश की संभावना जताई जा रही है, ग्रामीणों को डर सता रहा है कि यदि समय रहते स्थाई समाधान नहीं हुआ तो इस बार भी हालात दोहराए जा सकते हैं। ग्राम पंचायत प्रशासक बलदेव सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त माह में हुई भारी बारिश के दौरान गिनानी जोहड़ में अत्यधिक जलभराव हो गया था। आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक रूप से नीचा होने तथा चारों ओर की कृषि भूमि ऊंची होने के कारण बारिश का पूरा पानी जोहड़ में एकत्रित हो गया। जलधारण क्षमता पूरी होने के बाद पानी आबादी में घुस गया, जिससे करीब 150 परिवार प्रभावित हुए। कई घरों में पानी भर गया और लोगों को अपने घर छोडक़र ग्राम पंचायत, धर्मशाला तथा प्राथमिक विद्यालय परिसर में लगाए गए टेंटों में शरण लेनी पड़ी। पंचायत ने भोजन, राहत एवं पानी निकासी के लिए पंपों की व्यवस्था भी की, लेकिन टेंट किराया, डीजल और भोजन पर हुए खर्च का भुगतान आज तक पंचायत को नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि मानसून के आगमन के साथ ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्राम पंचायत की ओर से नालियों की सफाई सहित आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन यह केवल अस्थाई उपाय हैं।

जब तक बरसाती पानी की स्थाई निकासी की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हर वर्ष बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका बनी रहेगी। बलदेव सिंह ने बताया कि गत वर्ष बारिश के बाद सितंबर-अक्टूबर में प्रशासनिक अधिकारियों एवं तकनीकी इंजीनियरों ने गांव का निरीक्षण किया था। उस दौरान ग्राम पंचायत ने सुझाव दिया था कि गिनानी जोहड़ से अतिरिक्त बरसाती पानी को पाइपलाइन अथवा ड्रेनेज के माध्यम से घग्घर नदी तक पहुंचाने की स्थाई व्यवस्था की जाए। तकनीकी अधिकारियों ने सर्वे कर प्रस्ताव पंचायती राज विभाग, पंचायत समिति और जिला परिषद को भी भेज दिया था। उन्होंने बताया कि इसी मांग को लेकर एक मई को एडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया और बताया गया कि गिनानी जोहड़ के आसपास का क्षेत्र काफी नीचा होने के कारण हर वर्ष बारिश का पानी तेजी से यहां एकत्रित हो जाता है। पूर्व में बनाए गए तीन बोरवेल भी अत्यधिक जलभराव की स्थिति में पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जोहड़ से घग्घर नदी तक नाला-ड्रेनेज अथवा पाइपलाइन का निर्माण कर अतिरिक्त पानी की निकासी की स्थाई व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है घग्घर नदी तक जल निकासी परियोजना को सिरे चढ़ाने की मांग प्रशासक बलदेव सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष जलभराव से कई मकानों, घरेलू सामान एवं अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ था। लोगों को आवागमन, पेयजल, स्वच्छता और दैनिक जीवन से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा था तथा संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी बढ़ गया था। संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों की ओर से क्षेत्र का निरीक्षण एवं पैमाइश पहले ही की जा चुकी है। इसलिए प्रशासन से शीघ्र तकनीकी सर्वे के आधार पर घग्घर नदी तक जल निकासी परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने की मांग की गई है। ग्राम पंचायत प्रशासक ने कहा कि यदि मानसून के दौरान दोबारा भारी बारिश होती है और स्थाई समाधान नहीं किया गया तो स्थिति फिर गंभीर हो सकती है। ऐसे में भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
