

श्रीगंगानगर (भटनेर एक्सप्रेस) श्रीगंगानगर में रविवार को न्यायिक अधिकारियों के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में राजस्थान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधिपति महोदय महेंद्र कुमार गोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान श्रीगंगानगर के माननीय जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री रविन्द्र कुमार और हनुमानगढ़ के माननीय जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री तनवीर चौधरी सहित न्यायिक अधिकारीगण ने भी भाग लिया।
माननीय न्यायाधिपति महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सेमिनार में समसामयिक कानूनी विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। न्याय प्रशासन को अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से न्यायाधिपति महोदय ने उपस्थित अधिकारियों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
सेमिनार के प्रथम सत्र में ‘‘लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में न्यायाधीशों की भूमिका’’ विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की रोकथाम के लिए पॉश (पीओएसएच) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
साथ ही, महिलाओं के अधिकारों एवं गरिमा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तथा उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर प्रकाश डाला गया। न्यायिक कार्यवाहियों और निर्णयों में लिंग-तटस्थ भाषा के उपयोग तथा प्रशासनिक कार्यों में लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
द्वितीय सत्र में ‘‘डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों में धन की वापसी’’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) एवं संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अंतर्गत शिकायतों के पंजीकरण, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के वर्गीकरण, धन को फ्रीज अथवा होल्ड करने तथा बैंक खातों और संपत्तियों की जब्ती से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
इसके अलावा, जब्त की गई राशि की अंतरिम एवं अंतिम कस्टडी तथा सक्षम न्यायालय के क्षेत्राधिकार के संबंध में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों पर भी चर्चा की गई।
सेमिनार के अंतिम सत्र में ‘‘धन डिक्री (मनी डिक्री) के निष्पादन और संबंधित कार्यवाही’’ विषय पर गहन विचार-विमर्श किया गया। न्यायिक अधिकारियों ने धन डिक्री के प्रभावी निष्पादन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं एवं व्यवहारिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के समापन पर सेमिनार के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं ज्ञानवर्धक विचारों के लिए माननीय न्यायाधिपति श्री महेंद्र कुमार गोयल का आभार व्यक्त किया गया। सेमिनार में उपस्थित अधिकारियों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों को न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में उपयोगी बताया।
