
-10 अगस्त को देशव्यापी किसान-मजदूर जेल भरो आंदोलन का किया ऐलान
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) एवं राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में अग्रसेन धर्मशाला में जिला स्तरीय विशाल किसान-मजदूर कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन में जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण कार्यकर्ताओं ने भाग लेते हुए केंद्र सरकार की कथित किसान एवं मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। सम्मेलन में विभिन्न संगठनों के नेताओं ने कृषि, श्रम एवं ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे तथा 10 अगस्त को देशभर में किसान-मजदूर जेल भरो आंदोलन में व्यापक भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कॉ. पेमाराम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार किसान विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले लाए गए तीन कृषि कानूनों को किसानों के लंबे संघर्ष के बाद वापस लेना पड़ा, लेकिन अब सरकार बीज विधेयक और ट्रेड बिल जैसे नए कानून लेकर आई है, जो किसानों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आज तक स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं कर पाई है और किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी प्रभावी रूप से नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत, कर्ज और आर्थिक संकट के कारण किसान कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, लेकिन अब किसान आत्महत्या नहीं बल्कि संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि 10 अगस्त को पूरे देश में किसान-मजदूर जेल भरो आंदोलन आयोजित कर सरकार पर किसान-मजदूर विरोधी नीतियां वापस लेने का दबाव बनाया जाएगा।
राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कॉ. दुर्गा स्वामी ने कहा कि ग्रामीण मजदूरों के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा की जगह ग्राम रोजगार (GRAM-ROZGAR) व्यवस्था लाकर रोजगार की गारंटी समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में मजदूरों को नियमित काम मिलने की कोई गारंटी नहीं है और सरकार कभी भी कार्य बंद कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2026 में कई स्थानों पर मनरेगा और ग्राम रोजगार से जुड़े कार्य बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का 60 प्रतिशत वित्तीय भार राज्य सरकारों पर डालने से इसे प्रभावी ढंग से लागू करना कठिन होगा। उन्होंने ग्रामीण मजदूरों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के प्रदेश अध्यक्ष कॉ. भंवर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों से मजदूरों के हड़ताल करने और अपनी आवाज उठाने के अधिकार पर असर पड़ रहा है तथा रोजगार और वेतन सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों की रक्षा के लिए देशभर के मजदूरों को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा।
कन्वेंशन के समापन अवसर पर कॉ. आत्मा सिंह ने कहा कि किसान, खेत मजदूर और औद्योगिक श्रमिकों की साझा लड़ाई को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक किसान-मजदूर विरोधी नीतियां वापस नहीं ली जातीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
कन्वेंशन में शेर सिंह शाक्य, सखी रोहिताश सोलंकी, बसंत सिंह, जगजीत सिंह जग्गी, मनीराम मेघवाल, पहलाद बहलोल, सुरेश स्वामी, गोपाल, गुरदेव सिंह, बग्गा सिंह, श्यामलाल, बिंटू राम, अमरजीत, विनोद मावर, वेद मक्कासर, सुरेश जोडकिया, जगदीश यादव, सोपत राम, संदीप बरुण बिश्नोई, सुरेंद्र शर्मा, बलराम स्वामी, मेवाराम, कृपाराम, रामचंद्र, महिला समिति की अध्यक्ष सरबजीत कौर, रिछपाल सिंह राठौड़, गुरु प्रेम सिंह, सुल्तान खान, नौजवान सभा के जिला अध्यक्ष देवीलाल सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने आगामी आंदोलनों को सफल बनाने और किसान-मजदूर एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।

