
नई दिल्ली। नौकरीपेशा और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की बात कही गई थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी।
सरकार का यह नया नियम 17 सितंबर 2026 यानी ‘विश्वकर्मा जयंती’ के दिन से लागू हो जाएगा। इस फैसले के लागू होने से ऐसे कर्मचारी जिनकी सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है, वे भी स्वतः ही EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में आ जाएंगे। सरकार के अनुसार, इस ऐतिहासिक फैसले से 51 लाख से लेकर 1 करोड़ तक अतिरिक्त कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा।
इस बदलाव से कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना (EDLI) के तहत मिलने वाले लाभों और बीमा कवर का दायरा काफी बढ़ जाएगा। करीब 12 साल बाद किए गए इस बदलाव (पिछला बदलाव सितंबर 2014 में हुआ था) से कर्मचारियों के पीएफ और पेंशन खाते में योगदान बढ़ेगा। नए नियमों के मुताबिक, नियोक्ता (Employers) का योगदान प्रति कर्मचारी ₹600 बढ़ जाएगा। वहीं, EPS के तहत कर्मचारियों का अधिकतम अंशदान मौजूदा ₹1,250 से बढ़कर ₹2082.5 (नई ₹25,000 की सीमा का 8.33%) हो जाएगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने से सरकारी खजाने पर सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है, जो मौजूदा ₹10,250 करोड़ के बजटीय समर्थन से अधिक है।
