
हनुमानगढ़। उपखण्ड अधिकारी दिव्या चौधरी ने मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक ली। लोकसभा चुनाव के बाद हुई पहली बैठक में प्राथमिकता के अनुसार राजस्थान सम्पर्क के बकाया प्रकरणों के निपटारे पर चर्चा की गई। एसडीएम दिव्या चौधरी ने सभी विभागों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि रूटीन के काम जिससे सामान्य जनता प्रभावित होती है, वह समयबद्ध रूप से निपटाए जाएं।
एसडीएम ने पुलिस उप अधीक्षक व थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि पेंडिंग प्रकरणों के संबंध में उनकी समय पर रिपोर्ट आ जाए। उन्होंने कहा कि कुछ एक केस में तामिल की पेंडेंसी रहती है, चूंकि वो हर सातवें दिन रिव्यू किया करेंगे, उम्मीद करते हैं कि हर सात दिन बाद इस आशय की तामिली करवा दें। इसके अलावा नायब तहसीलदार के साथ म्यूटेशन पेंडेंसी, विभाजन प्रस्ताव की पेंडेसी के संबंध में विस्तार से चर्चा की।एसडीएम ने कहा कि सा मान्य किसान के लिए रास्ते के प्रकरण बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, उनको सात दिन में निस्तारित कर रिपोर्ट पेश करें।
एसडीएम ने मौसमी बीमारियों व आगामी दिनों में लू के प्रकोप को देखते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां पानी एकत्रित रहता है। वहां दवा का छिड़काव किया जाए। बीसीएमओ के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है कि मौसमी बीमारियों के संबंध में लोग जागरूकता के लिए कैंपेन चलाएं। क्योंकि सभी पीएचसी-सीएचसी पर इसके संबंध में जागरूकता का कार्य किया जा रहा है।
एसडीएम ने बताया कि वर्तमान में नहरबंदी का कार्य चल रहा है। नहरबंदी के दौरान पेयजल की शहर में कोई समस्या न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पीएचईडी के एईएन को पाबंद किया। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक कहीं से पेयजल समस्या की बात सामने नहीं आई है और डिग्गियां पूर्ण रूप से भरी हुई हैं। साथ ही ट्यूबवैल का काम भी चल रहा है। रनिंग पेंशन के अप्रूवल के लिए भी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया। एसडीएम ने पीडब्ल्यूडी की ओर से करवाए जाने वाले विकास कार्यो को समयबद्ध रूप से करवाने के लिए अधिकारियों को पाबंद किया।
खेतों में आगजनी रोकने की सावधानियां बरतें किसान- कलेक्टर
जिला कलेक्टर कानाराम ने किसानों से खेतों में आगजनी एवं जनहानि को रोकने के लिए सावधानियां बरतने के लिए अपील की है। उन्होंने कहा कि खेतों में आग लगने तथा कृषि उपकरणों के उपयोग के समय असावधानी से घटनाएं हो सकती हैं। इसके लिए गेहूं की हार्वेस्टिंग एवं थ्रेसिंग के समय विभिन्न उपायों को ध्यान में रखते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि कंबाइन, थ्रेसर और रीपर आदि मशीनरी के उपयोग से पहले उसके ऑपरेटिंग मैनुअल से अच्छी तरह परिचित होना चाहिए। घटकों, कार्यों और सुरक्षा सुविधाओं को समझ कर कार्य में लेना ही सावधानी है। तेज मलबे और उड़ने वाले कणों जैसे संभावित खतरों से खुद को बचाने के लिए सुरक्षात्मक कपड़े जैसे दस्ताने, चश्मा और मजबूत जूते का उपयोग करें।
थ्रेसर शुरू करने से पहले, मशीन को दुर्घटनाओं या क्षति से बचाने के लिए आसपास के क्षेत्र से किसी भी बाधा, मलबे या ढीली वस्तुओं को हटा दें। जब थ्रेसर चालू हो तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें। मशीन चलने के समय उसमें पहुंचने या रूकावट को हटाने का प्रयास करने से बचें। कोई भी रख-रखाव या समायोजन करने से पहले, थ्रेसर को बंद कर दें। आकस्मिक सक्रियण के जोखिम को खत्म करने के लिए बिजली स्त्रोत को डिसक्नेक्ट कर दें। यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित रख-रखाव जांच करें कि थ्रेसर इष्टतम कार्यशील स्थिति में है। बेल्ट, गार्ड और मूविंग पाट्र्स का नियमित रूप से निरीक्षण करें। किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करें।
स्पष्ट दृश्यता बढ़ाने और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए कार्य क्षेत्र में उचित रोशनी सुनिश्चित करें। केवल हाथ में लिए गए काम पर ध्यान केंद्रित करें। फोन कॉल या बातचीत में ध्यान भटकाने से बचें। यदि परिवार के किसी सदस्य या श्रमिक के साथ काम कर रहे हैं, तो गेहूं थ्रेसिंग कार्यों में शामिल सभी को उचित प्रशिक्षण प्रदान करें। उन्हें सुरक्षा प्रक्रियाओं, संभावित जोखिमों और आपातकालीन प्रोटोकॉल के बारे में शिक्षित करें। पूरी तरह चार्ज मोबाइल फोन अपनी पहुंच के भीतर रखें। आपात स्थिति में एक स्पष्ट संचार योजना रखें। अपना स्थान और संपर्क विवरण किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करें, जो जरूरत पड़ने पर सहायता कर सके।
खेतों में आगजनी रोकने के लिए
रबी फसलों में विशेषकर पूर्ण पकाव अवस्था की गेहूं फसल में हार्वेस्टिंग/थ्रेसिंग के समय विभिन्न कारणों से आगजनी होने पर अनाज और सूखे चारे का नुकसान सहित सीजन की पूरी मेहनत खत्म हो जाती है। अत: मेहनत आगजनी की भेंट नहीं चढ़े, इसके लिए आवश्यक उपाय अपनाएं। पकी फसल क्षेत्र के आसपास धूम्रपान नहीं करें। खेत के आसपास घास-फूस, फसल अवशेष नहीं जलाएं। खेत में चूल्हा चौका नहीं जलाएं। खेत पर उपलब्ध पानी के सभी संसाधन चालू हालत में रखें। विद्युत स्त्रोत जैसे ट्रांसमीटर, खम्भा, विद्युत लाइन के आसपास खड़ी फसल को काटकर इकठ्ठा नहीं करें, जिससे शॉर्ट सर्किट की स्थिति में आग नहीं फैले।
