
श्रीगंगानगर/ सूरतगढ़ नहाय-खाय के साथ शनिवार को 4 दिन तक चलने वाले छठ महापर्व की शुरुआत हो गई। श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान-ध्यान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर उनसे शक्ति की कामना की। व्रती महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाया। इसके बाद घरों में पूजा-अर्चना कर कद्दू की सब्जी, अरवा चावल का भात व चना दाल तैयार हुआ। इसे भगवान को अर्पित करने के बाद स्वयं ग्रहण किया, फिर प्रसाद स्वरूप वितरित भी किया गया। दूसरे दिन यानी 26 अक्टूबर को खरना अनुष्ठान होगा।
दिनभर उपवास कर सूर्यास्त के बाद व्रतीजन भगवान की पूजा-अर्चना कर गुड़ की खीर, रोटी, केले का नैवेद्य देने के बाद स्वयं इसे ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा। कई दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत के लिए शहर के गोल बाजार, स्वामी दयानंद मार्ग, पुरानी आबादी आदि बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। शनिवार को लोगों ने छठ के लिए कपड़े से लेकर दउरा खरीदा तो कहीं, सूप, मिट्टी व कांसे के बर्तन के साथ ही टोकरी और फल खरीदते हुए लोग नजर आए।
मिथिला सेवा समिति व मिथिला डाला छठ पूजा समिति की ओर से 25वां छठ पूजा महोत्सव तीन पुलिया पर मनाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष विनोद साहू ने बताया कि 27 अक्टूबर को दोपहर 3:15 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसी दिन यहां दोपहर 2 बजे से भंडारा लगाया जाएगा। इस कड़ी में शाम 5:51 बजे से सायंकाल अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद रात 9:15 बजे माता का जागरण होगा। महिलाओं ने एक दूसरे की मांग में सिंदूर भरा।
खरना पूजन की सही विधि :
{ सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ संपन्न करें और शाम को दोबारा स्नान कर नए या साफ कपड़े पहनें।
{ कुछ घरों में महिलाएं धोती को साड़ी की तरह पहनती हैं, यह घर की परंपरा पर निर्भर करता है।
{ आम की लकड़ियों से आग जलाकर प्रसाद (भोजन) तैयार करें।
{ प्रसाद तैयार होने के बाद सबसे पहले छठी मैया को भोग लगाएं।
{ पूजा संपन्न होने के बाद व्रती कुछ समय वहीं बैठकर माता का ध्यान करें। क्या है नहाय खाय : व्रत रखने वाली महिलाओं के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस दिन व्रत से पहले नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने को ही नहाय-खाय कहते हैं। मुख्य तौर पर इस दिन छठ व्रती लौकी की सब्जी और चने का दाल ग्रहण करते हैं। पवित्रता और शुद्धता का ध्यान: सब्जियों को पूरी पवित्रता के साथ धोया और पकाया जाता है। खाना पकाने के दौरान भी साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है। खाना पकाने के दौरान भी छठव्रती महिलाएं छठी मईया के गीत गाती हैं।
नहाय खाय के दिन जो खाना खाया जाता है उसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। 36 घंटे का निर्जला व्रत : 36 घंटे निर्जला रहने वाले छठ व्रतियों को यह व्रत कठिन नहीं बल्कि आसान लगता है। व्रत करने वाला व्यक्ति व्रत पूरा होने तक जमीन पर ही सोता है। नहाय खाय के दिन बनने वाले भोजन को बनाने के दौरान भी कई खास बातों का ध्यान रखना होता है, जो खाना इस दिन बनाया जाता है उसे रसोई के चूल्हे पर नहीं बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जाता है।
छठ पूजा का महत्वः छठ श्रद्धा और आस्था से जुड़ा है, जो इस व्रत को पूरी निष्ठा और श्रद्धा से करता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। छठ व्रत, सुहाग, संतान, सुख-सौभाग्य और सुखमय जीवन की कामना के लिए किया जाता है। इस पर्व में सूर्य देव की उपासना का खास महत्व है। चूल्हे में केवल आम की लकड़ी का ही होता है इस्तेमाल : इस दिन चूल्हे में केवल आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता है। इस दिन तमाम नियमों का पालन करते हुए भोजन बनाकर सबसे पहले सूर्य देव को भोग लगाया जाता है। उसके बाद छठव्रती भोजन ग्रहण करते हैं और उसके बाद ही परिवार के दूसरे सदस्य भोजन कर सकते हैं।
