
आरोपी बलजिंद्र पर डकैती, लूट, हत्या, हत्या के प्रयास, जेल ब्रेक के 41 मुकदमे : एसपी डॉ. दुहन ने बताया कि वारदात का मुख्य आरोपी बलजिंद्र सिंह के खिलाफ यह 41वां मुकदमा है। वह पंजाब पुलिस में था तब हत्या के मामले में उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद से गैंग बनाकर वारदातें कर रहा है। उसके खिलाफ लूट, डकैती, हत्या, हत्या का प्रयास, जेल ब्रेक, मादक पदार्थ तस्करी, हथियार तस्करी, यूपी में गैंगस्टर एक्ट आदि के आरोप के मुकदमे दर्ज हैं। वारदात के खुलासे के लिए पांच टीमें गठित की गई थीं। आरोपियों का पता लगाने को टीमों ने पंजाब-हरियाणा के 300 किमी के दायरे में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। आरोपियों को दिल्ली क्राइम ब्रांच की मदद से दिल्ली से राउंडअप किया गया।
पांच टीमें गठित कीं, घटनास्थल पर लगे कैमरों में भी फुटेज पहचान लायक नहीं थे : एसपी ने एएसपी भंवरलाल व सीओ श्रीकरणपुर संजीव चौहान के नेतृत्व में पहली टीम केसरीसिंहपुर एसएचओ बलवंतराम, दूसरी टीम समेजा कोठी एसएचओ कृष्णकुमार, तीसरी टीम गजसिंहपुर एसएचओ हरबंस सिंह, चौथी टीम डीएसटी प्रथम से कांस्टेबल राजकुमार बेनीवाल, अभिब खान, कालूराम, दिनेशकुमार, चंद्रशेखर, पांचवीं टीम डीएसटी सेकंड प्रभारी एसआई राजेंद्र स्वामी, हैड कांस्टेबल राजेंद्रकुमार की गठित की। टीमों ने 42 जीजी गांव से लेकर 300 किमी दायरे के 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले लेकिन आरोपी इनमे नहीं आए। घटनास्थल के कैमरों में भी फुटेज ज्यादा मददगार नहीं थे। पुलिस तकनीक की बदौलत आरोपियों को पकड़ पाई। डॉ.अमृता दुहन, एसपी, श्रीगंगानगर .आरोपी पुलिस में रहा हुआ है। इसलिए उसने पकड़े जाने से बचने को पूरी कोशिश की। जगराओं से श्रीगंगानगर और 42 जीजी पहुंचने और वापस यहां से वारदात कर दिल्ली जाने तक सीसीटीवी कैमरों में आने से बचे। गांवों के रूट इस्तेमाल किए। .आशंका है कि वारदात में काम ली स्कॉर्पियो चोरी की हो सकती है। जानबूझकर हरियाणा के नंबर की फर्जी प्लेट लगाई गई थी। आरोपियों ने अपना कोई सा भी फोन इस्तेमाल नहीं किया। एक फोन लेकर आए, वह और सिम भी चोरी की थी। . जिस फोन को लेकर आए थे, उसे राजस्थान की सीमा में पहुंचकर ऑन किया और वारदात के बाद भागते समय राजस्थान सीमा में ही बंद कर लिया। इस सिमकार्ड की तकनीकी रूप से डिटेल खंगाली तो महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे। जांच की दिशा तय हुई। भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर जिले के केसरीसिंहपुर थाना एरिया के गांव 42 जीजी में 18 अक्टूबर की रात को डकैती की असफल वारदात का खुलासा करते हुए तीन आरोपी पकड़े गए हैं। एसपी डॉ. अमृता दुहन ने प्रेसवार्ता कर वारदात का खुलासा किया। पुलिस टीमों ने आरोपी सरगना 54 वर्षीय बलजिंद्र सिंह उर्फ बलविंद्र सिंह उर्फ सतनाम उर्फ सत्ता उर्फ बादशाह उर्फ विजेंद्र जटसिख पुत्र सौदागर सिंह उर्फ महेंद्र उर्फ प्रेम सिंह, गांव खतराए कलां जिला अमृतसर हाल चिमना जगरावां, उसके 24 वर्षीय बेटे सर्वजीत उर्फ छिंदा तथा तीसरे आरोपी दिल्ली के चंद्र विहार निवासी 42 वर्षीय सुरेंद्र सिंह उर्फ छिंदा पुत्र बलवीर सिंह रामगढ़िया को गिरफ्तार किया है। इनको मंगलवार को बापर्दा अदालत के आदेश से न्यायिक हिरासत में भिजवाया गया है। पीड़ित परिवार के सामने आरोपियों की पहचान को शिनाख्त परेड करवाई जाएगी। वारदात में शामिल चंडीगढ़ निवासी सोनू, दिल्ली निवासी संजय व संजीव की तलाश की जा रही है। परिवादी 42 जीजी निवासी गुरचरणसिंह की ओर से 19 अक्टूबर को केसरीसिंहपुर थाने में केस दर्ज किया गया था। पीड़ित गुरचरण सिंह पूर्व राज्य मंत्री सुरेंद्रपालसिंह टीटी का दामाद है। वारदात करवाने वाला पीड़ित गुरचरण सिंह से रंजिश रखता है। वह 42 जीजी गांव का ही रहने वाला है। उसी ने सरगना बलजिंद्र उर्फ बलविंद्र को टारगेट दिया। आरोपी ने पीड़ित के गांव में मकान की रैकी भी करवाई ताकि वारदात करने के दौरान आसानी रहे। पुलिस के अनुसार जगराओं में सिग्नेचर फास्ट फूड का काम करने वाला बॉबी नाम का युवक 42 जीजी का निवासी है। पुलिस के हाथ अहम सुराग उसी से बातचीत का लगा। आरोपी बलजिंद्र सिंह डकैती की वारदातें पुलिस वर्दी पहनकर और पुलिस के जैसी लाल/नीली बत्ती लगी गाड़ी लेकर करता है। वह टारगेट के घर सर्च करने का कहकर घुसता है। इसके बाद घर में मौजूद सदस्यों को पिस्टल दिखाकर बंधक बनाकर डकैती की वारदात को अंजाम देता है। वारदात में काम ली गई स्कॉर्पियों के लगी नंबर प्लेटें फर्जी थीं। वारदात के खुलासे में साइबर सेल के कांस्टेबल पवन लिंबा की विशेष भूमिका रही। 42 जीजी में डकैती की वारदात के तीन आरोपी बापर्दा गिरफ्तार किए।
