
एक खेत में खड़ी सरसों की फसल। (फाइल फोटो) जिले में रबी फसलों की बिजाई की जा रही है। अब तक कुल 2 लाख 36 हजार 950 हेक्टेयर में सभी फसलों की बिजाई हुई है। सरसों की बिजाई का उपयुक्त समय निकल चुका है। किसान इन दिनों गेहूं की बिजाई में जुटे हुए हैं। अब तक 5310 हेक्टेयर में गेहूं, 21 हजार 240 हेक्टेयर में जौ, 84 हजार 110 हेक्टेयर में चना, 1 लाख 20 हजार 450 हेक्टेयर में सरसों, 130 हेक्टेयर में तारामीरा, 5170 हेक्टेयर में हरा चारा और 520 हेक्टेयर में सब्जी की बुवाई हो चुकी है।
गत वर्ष गेहूं का बिजाई क्षेत्र करीब सवा दो लाख हेक्टेयर था। इस बार ढाई लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की बिजाई होने की संभावना है। सरसों की फसल में सिंचाई पानी की कम जरूरत रहती है। जिन वर्षों में इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा प्रणाली में रबी सीजन में कम पानी मिलने की संभावना होती है उस वर्ष सरसों व चना की बिजाई ज्यादा होती है। पर्याप्त सिंचाई पानी मिलने की स्थिति में गेहूं की बिजाई ज्यादा होती है। ^मौसम विभाग की ओर से इस बार सर्दी ज्यादा पड़ने की संभावना जताई गई है।
पाला मारने से सरसों को नुकसान होता है। गेहूं के दाम भी हर वर्ष अच्छे रहते है। इसलिए कृषकों द्वारा इस बार सरसों की बिजाई कम कर गेहूं की बुवाई ज्यादा की जा रही है। डॉ. प्रमोद यादव, संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), हनुमानगढ़ सरसों की तुलना में गेहूं का उत्पादन ज्यादा होता है। जितनी ज्यादा सर्दी पड़ती है उतनी ही पैदावार अधिक होती है। जिले में गेहूं का औसत उत्पादन 12 से 15 क्विंटल प्रति बीघा तक होता है।
वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित था। राज्य सरकार ने किसानों को 150 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया। इस बार भी केंद्र सरकार गेहूं की एमएसपी में बढ़ोतरी करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि गेहूं की एमएसपी पर खरीद भी होती है। एफसीआई सहित अन्य एजेंसियों की ओर से सुचारू रूप से खरीद की जाती है। सरसों का एमएसपी निर्धारित है, लेकिन इसकी खरीद नहीं होती। उत्पादन ज्यादा होने पर बाजार भाव एमएसपी से कम रहते हैं। इसलिए किसानों में सरसों के उत्पादन और बाजारों भावों को लेकर अनिश्चितता रहती है। किसान को मंडी में सरसों बिकने पर ही पता चलता है कि इस दाम उपज बेची है।
गेहूं की शत-प्रतिशत एमएसपी पर खरीद होती है। ऐसे में बाजार भाव भी एमएसपी के लगभग बराबर रहते हैं। इसलिए किसान सरसों की बजाए गेहूं की बिजाई को महत्व दे रहे हैं। गेहूं की बिजाई से पशुओं के लिए चारे (तूड़ी) की समस्या भी नहीं रहती। भास्कर संवाददाता | हनुमानगढ़ जिले में इस बार 1 लाख 20 हजार 450 हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई है। बुवाई का यह आंकड़ा पिछले 6 वर्षों में सबसे कम है। गत वर्ष की तुलना में इस बार बिजाई क्षेत्र करीब 75 हजार हेक्टेयर घटा है। पिछले साल 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर में किसानों ने सरसों की बिजाई की थी। इस बार बारिश ज्यादा होने की वजह से सर्दी भी ज्यादा पड़ने की संभावना है।
पकाव के समय मौसम अनुकूल नहीं रहने की स्थिति में सरसों के उत्पादन में भारी गिरावट आती है। साथ ही इस बार सिंचाई पानी भी पर्याप्त है। इसलिए गेहूं का रकबा बढ़ने की संभावना है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में 1 लाख 30 हजार 445 हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई थी। 2020-21 से 2024-25 तक औसत प्रति वर्ष 2 लाख हेक्टेयर में बिजाई हुई। सरसों की बुवाई कम होने के कारण उत्पादन भी कम होगा। ऐसे में सरसों के तेल के दामों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पकाव के समय धुंध और शीत लहर चलने के कारण सरसों के उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है। मौसम अनुकूल रहे तो 4 से 5 क्विंटल प्रति बीघा तक औसत उत्पादन होता है। मौसम प्रतिकूल रहने की स्थिति में पैदावार कम होती है। इसलिए किसान सरसों की बजाए गेहूं की बिजाई को महत्व दे रहे हैं। इस बार सिंचाई पानी की भी कमी नहीं है। इसलिए कृषकों द्वारा गेहूं की बिजाई ज्यादा क्षेत्र की की जा रही है।
सर्दी ज्यादा पड़ने की संभावना, इसलिए सरसों का बिजाई क्षेत्र कम हुआ
