
युवा प्रेरिका महासाध्वी डॉ. शिव प्रज्ञा जी महाराज ने गुरुवार को अग्रसेन नगर स्थित एसएस जैन सभा भवन में प्रवचन में कहा कि धर्म की स्थापना के लिए अहिंसा, तप और संयम आवश्यक है। अहिंसा हिंसा में और शांति अशांति में बदल रही है, यह चिंता और चिंतन का विषय है। गंगधरा श्रीगंगानगर की बेटी डॉ. शिव प्रज्ञा अपनी सहयोगी साध्वी खुशी महाराज एवं साध्वी शियल महाराज के साथ संगरिया चातुर्मास के बाद यहां आई हैं, इनका 21 नवम्बर तक प्रवास प्रस्तावित है। साध्वीवृंद के प्रवचन का समय प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक रखा गया है।
महासाध्वी ने कहा कि सूरज पहले जिस दिशा में उगता था, आज भी उसी दिशा से उग रहा है लेकिन भारतीय संस्कृति के स्थान पर पश्चिम का अंधानुकरण किया जा रहा है। खाने-पीने के समय में बदलाव कर दिया गया है। भोजन में मिलावट देखने में आती है, नैतिक मूल्यों में भी गिरावट आ रही है। उन्होंने गीतिका वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है के माध्यम से भी सभी को सही जीवन जीने की प्रेरणा दी।
