
हनुमानगढ़। गौशाला परिसर स्थित कामधेनु सत्संग भवन में जारी श्रीरामकथा का आध्यात्मिक वातावरण दिन-प्रतिदिन और प्रखर होता जा रहा है। स्वर्गीय दुलारी देवी सर्राफ, धर्मपति स्वर्गीय चंदूलाल सर्राफ की पावन स्मृति में उनके पुत्र पंकज सर्राफ द्वारा करवाए जा रहे इस दिव्य आयोजन के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और रामनाम का अनूठा संगम दिखाई दिया। बाल संत श्री भोलेबाबा जी महाराज की मंगल उपस्थिति में आज की कथा अत्यंत प्रेरणादायी एवं रोमांचक ढंग से सम्पन्न हुई।
आज के पावन दिवस पर महाराज श्री ने रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों—ताड़का वध, राक्षसों के संहार, सीता स्वयंवर तथा परशुराम संवाद—का विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गुरु विश्वामित्र के संग वनवास यात्रा के दौरान किस प्रकार भगवान श्रीराम ने पहली बार ताड़का नामक राक्षसी का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। ताड़का वध का प्रसंग सुनते ही वातावरण “सियाराम” के जैकारों से गूंज उठा। महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रसंग केवल एक युद्ध कथा नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अपने मार्ग में आने वाली हर बुराई का साहसपूर्वक सामना करना ही धर्म है।
इसके बाद राक्षसों के संहार की कथा का विस्तृत वर्णन किया गया, जिसमें राम और लक्ष्मण ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हुए अनेक राक्षसों का नाश किया। महाराज जी ने कहा कि यह प्रसंग हमें जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस प्रेरक संदेश को बड़ी भावनात्मकता से आत्मसात किया।
सीता स्वयंवर के पावन प्रसंग पर महाराज श्री ने बताया कि किस प्रकार जनकपुरी में धनुष-भंग कर श्रीराम ने माता सीता का वरण किया। स्वयंवर का यह दिव्य प्रसंग वर्णन करते ही पूरा सत्संग भवन जय-जय श्रीराम और जय-जय सीताराम के उद्घोषों से भर उठा। महाराज जी ने कहा कि राम और सीता का मिलन केवल विवाह नहीं, बल्कि मर्यादा, प्रेम और आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक है।
कथा के अंत में परशुराम संवाद का रोमांचक प्रसंग सुनाया गया। महाराज जी ने बताया कि धनुष-भंग होने पर परशुराम जी क्रोधित होकर आए, लेकिन श्रीराम के तेज, शांति और सत्यपूर्ण वाणी से उनका अहं शांत हुआ और उन्होंने श्रीराम के दिव्य स्वरूप को स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान किया। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को विनम्रता और धर्मशीलता का अद्भुत संदेश दिया।
आज की कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान पंकज सर्राफ ने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कर किया। आयोजन समिति के मनोहरलाल बंसल ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 6 बजे राधा नाम प्रभात फेरी निकाली जा रही है, जिसमें हैप्पी बत्रा, कृष्ण मिड्ढा, प्रदीप सेतिया, अमित, ओम सोनी सहित प्रभात फेरी के सदस्य भाग ले रहे हैं। यह दिव्य कथा 20 नवंबर तक प्रतिदिन आयोजित होगी, जबकि 21 नवंबर को हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति के साथ इसका भव्य समापन होगा। पूर्णाहुति के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन भी रखा गया है।
इस आयोजन को सफल बनाने में सर्राफ परिवार के पिंकी सर्राफ, पंकज सर्राफ, कृणा सर्राफ, योगिता सर्राफ, मुरारीलाल सर्राफ, अजय सर्राफ, रमन सर्राफ, रामा सर्राफ, लाला सर्राफ, संजय सर्राफ, दौलत सर्राफ एवं राजेंद्र बड़िया सहित अनेक परिवारजन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं श्री गौशाला समिति के पदाधिकारी और नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पूरे परिसर में व्याप्त भक्ति, आध्यात्मिकता और दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत अनुभव का माध्यम बन रही है, जिससे नगर में आस्था का विशेष वातावरण व्याप्त है।
