
हनुमानगढ़ जिले में इन दिनों आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। इसका कारण है- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को प्रशासन द्वारा एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्य में लगाना। मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े इस महत्त्वपूर्ण कार्य ने आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित गतिविधियों को लगभग ठप कर दिया है। जिले के 1273 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां 69924 से अधिक बच्चे प्रारंभिक शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों का लाभ लेते हैं।
पिछले कुछ दिनों से अधिकांश केंद्रों में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कई केंद्रों पर तो सुबह से ही ताले लटके दिखाई देते हैं, जबकि खुले केंद्रों में भी बच्चों की उपस्थिति काफी कम हो रही है। अभिभावक चिंता जता रहे हैं कि छोटे बच्चों की दिनचर्या और सीखने का माहौल लगातार बाधित होता जा रहा है। केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं होने की वजह से पोषण आहार वितरण और गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। शहरी क्षेत्र में भी यही दिक्कत आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों के सीखने-सिखाने का सबसे महत्वपूर्ण समय इसी उम्र में होता है, और केंद्रों के बंद रहने से यह प्रक्रिया रुक रही है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि एसआईआर कार्य के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और पोषण कार्यक्रम बाधित न हों। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ड्यूटी सामान्यतः सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहती है। लेकिन एसआईआर कार्य शुरू होने के बाद उनकी जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं।
अब उन्हें सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक घर-घर जाकर मतदाताओं का रिकॉर्ड सत्यापित करना पड़ रहा है। इस वजह से वे केंद्रों पर नियमित समय नहीं दे पा रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा पोषण वितरण दोनों बाधित हो रहे हैं। स्टाफ का कहना है कि अतिरिक्त काम तो बढ़ गया है, लेकिन इसके बदले सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाएगा। एक कार्यकर्ता ने बताया, काम दोगुना हो गया है, लेकिन तनख्वाह वही मिलेगी। ऊपर से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान अलग हो रहा है।
उपनिदेशक बोली- आदेशों की पालना कर रहे हैं जिला कलेक्टर के आदेशों की पालना की जा रही है। सभी विभागों को एसआईआर में लगा रखा है। लोकतंत्र का सबसे बड़ा कार्य करना है। 4 दिसंबर तक की गाइडलाइन है। इसके बाद ही शायद कार्यकर्ताओं को केंद्रों पर लगाया जाएगा। सुनीता शर्मा, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, हनुमानगढ़।
