
हनुमानगढ़ जिलेभर के उपभोक्ताओं के लिए बिजली कनेक्शन का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। डिस्कॉम में नए मीटरों की भारी कमी के कारण जिलेभर में 2 हजार से अधिक नए बिजली कनेक्शन के आवेदन लगभग छह महीनों से लंबित पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि निगम ने इनमें से 500 उपभोक्ताओं को डिमांड नोटिस जारी कर रखा है और इन उपभोक्ताओं ने लगभग 4 हजार रुपए भी जमा करवा रखे हैं। लेकिन मीटर उपलब्ध नहीं होने से कनेक्शन जारी ही नहीं हो पा रहे।
नतीजन उपभोक्ता रोजाना डिस्कॉम कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। जिले के 15 सब-डिविजनों में हर जगह औसतन 100 से 150 फाइलें पेंडिंग हैं। कुछ सब-डिवीजन तो ऐसे हैं, जहां यह संख्या 200 से भी ऊपर पहुंच चुकी है। उपभोक्ता बिजली कनेक्शन की जरूरतों को लेकर परेशान हैं। किसी ने नया घर बनवाया है, किसी ने दुकान शुरू की है, तो कुछ लोग पुराने खराब मीटर बदलवाने के लिए महीनों से दौड़ रहे हैं।
डिस्कॉम अधिकारियों ने माना कि अब भी करीब 40 हजार मीटर खराब पड़े हैं, जबकि नए मीटरों की सप्लाई धीमी गति से होती है। इसका सीधा असर नए कनेक्शनों और खराब मीटर बदलने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की पीड़ा:- डिमांड नोटिस लेकर क्या करें उपभोक्ताओं ने बताया कि डिमांड नोटिस लेकर वे महीनों से ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार मीटर न होने का ही जवाब मिलता है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद भी कनेक्शन न मिलना विभागीय अव्यवस्था को उजागर करता है। वहीं एक उपभोक्ता ने बताया डिमांड नोटिस भरने के बाद सोचा था कि अब कनेक्शन मिल जाएगा, लेकिन अधिकारी हर बार कहते हैं- मीटर नहीं आए, अगले हफ्ते आ जाएंगे। अब तीन महीने हो गए। न मीटर आया, न लाइन जुड़ी। डिस्कॉम को इस बात का अग्रिम अनुमान होना चाहिए था कि पुराने मीटर खराब हो रहे हैं और नए कनेक्शनों की डिमांड बढ़ रही है। सही समय पर मीटरों की खरीद और सप्लाई की योजना नहीं बनाई गई। तकनीकी गड़बड़ियां और कंपनियों की देर से सप्लाई भी सबसे बड़े कारण हैं, जिनसे मीटरों की कमी हुई। डिस्कॉम को चाहिए कि जिन उपभोक्ताओं ने आवेदन कर रखा है, उनसे राशि जमा ना करवाए, जब तक कि मीटर उपलब्ध ना हो। हर सब-डिवीजन में कम से कम 3 माह का बैक-अप स्टॉक अनिवार्य किया जाए। खराब मीटरों की थर्ड पार्टी टेस्टिंग और रियल-टाइम रिप्लेसमेंट सिस्टम लागू हो। उपभोक्ताओं को ऑनलाइन टोकन/प्रायोरिटी नंबर दिया जाए ताकि बार-बार ऑफिस न दौड़ना पड़े। खराब मीटर वाले उपभोक्ताओं को लंबे समय तक औसत बिल देने पड़ रहे हैं, जल्द मीटर बदलकर उन्हें राहत देनी चाहिए।
एसई बोले: बिजली मीटरों की आपूर्ति कम, प्राथमिकता से बदल रहे बिजली मीटरों की आपूर्ति कम हो रही है। जैसे-जैसे नए मीटर आते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जाता है। अभी करीब दो हजार मीटर नए कनेक्शन के लिए और 40 हजार खराब मीटर बदलने की आवश्यकता है। हालांकि अभी 500 मीटर आए हैं। मीटर की डिमांड समय-समय पर उच्चाधिकारियों से की जाती है। आरएस चारण, एसई, जोधपुर डिस्कॉम, हनुमानगढ़।
डिमांड के नाम पर डिस्कॉम ने 500 उपभोक्ताओं से राशि जमा करवा रखी है। घरेलू श्रेणी का एक किलोवाट का नया कनेक्शन लेने पर 200 रुपए फाइल चार्ज और इसके बाद लगभग 3800 रुपए डिमांड नोटिस पर जमा करवाए जाते हैं। इस तरह 500 उपभोक्ताओं से डिस्कॉम ने 20 लाख रुपए पहले ही जमा करवा लिए, लेकिन अभी तक इन्हें कनेक्शन जारी नहीं किए है। सबसे चिंताजनक स्थिति खराब मीटरों की है।
जिले में 40 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके मीटर लंबे समय से खराब हैं। ऐसे उपभोक्ताओं से डिस्कॉम औसत बिल की वसूली कर चपत लगा रहा है। खराब मीटरों के कारण गलत रीडिंग और स्पार्किंग की घटनाओं का खतरा बना हुआ है। 40 हजार खराब मीटर संकेत देते हैं कि डिस्कॉम ने वर्षों तक मीटरों की क्वालिटी का उचित ऑडिट नहीं किया।
